रिपोर्ट- अमेरिकी चुनाव में दखल दे रहीं भारतीय कंपनियां:फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से प्रचार; कंटेंट क्रिएटर्स पैसे लेकर विरोधी नेताओं की छवि खराब कर रहे- INA NEWS

अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में भारतीय कंटेंट क्रिएटर्स सोशल मीडिया के जरिए उम्मीदवारों का प्रचार कर रहे हैं।
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ये लोग पैसे लेकर फर्जी अकाउंट बनाते हैं और उनसे अपने उम्मीदवार के समर्थन में पोस्ट और वीडियो शेयर करते हैं। विरोधी नेताओं के भाषणों को काट-छांटकर गलत तरीके से पेश करते हैं और उनके खिलाफ झूठे दावे फैलाते हैं। यह काम सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है। भारतीय कंसल्टेंट्स अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और पड़ोसी देशों के चुनावों में भी काम कर रहे हैं। अमेरिकी उम्मीदवार के समर्थन में 28 फर्जी अकाउंट मिले अमेरिका के मिशिगन में डेमोक्रेटिक पार्टी की सीनेट प्राइमरी में हेली स्टीवंस के समर्थन में एक्स पर कम से कम 28 अकाउंट से वीडियो शेयर किए गए। इन वीडियो को 70 लाख से ज्यादा बार देखा गया। अल जजीरा के मुताबिक, इनमें से कम से कम 15 अकाउंट भारत से पोस्ट कर रहे थे। ऑनलाइन दुष्प्रचार पर नजर रखने वाले समूह एंटीबॉट4नवाल्नी ने इन अकाउंट्स की पहचान की थी। क्लेमसन यूनिवर्सिटी के मीडिया फॉरेंसिक हब के शोधकर्ताओं ने भी स्टीवंस के समर्थन में भारतीय अकाउंट्स और पेजों के इस्तेमाल की पुष्टि की। हालांकि, स्टीवंस यह प्राइमरी चुनाव हार गई थीं। उन्हें अब्दुल एल-सैयद ने हराया था। केन्या के चुनाव में रोज 600 रुपए लेकर बनाए पोस्ट अल जजीरा के मुताबिक, अहमदाबाद में रहने वाले 22 साल के कंटेंट क्रिएटर राजन कुमार ने 2022 में केन्या के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान विलियम रुटो के समर्थन में 50 सोशल मीडिया पोस्ट बनाए थे। इसके लिए उसे रोज 7 डॉलर यानी करीब 600 रुपए मिलते थे। राजन विरोधी नेताओं के भाषणों और इंटरव्यू के हिस्से काटकर इस तरह पेश करता था कि उनके बयान का मतलब बदल जाए। रुटो की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए झूठे दावों वाले पोस्टर भी बनाए जाते थे। कुछ महिला नेताओं की छवि खराब करने के लिए उनके निजी संबंधों को लेकर भी बातें फैलाई जाती थीं। राजन के मुताबिक, उसे कुछ दिनों में 100 तक पोस्टर और वीडियो बनाने का काम मिलता था। यह पूरा काम टेलीग्राम ग्रुप के जरिए होता था। रुटो के आधिकारिक चुनावी अकाउंट से ये पोस्ट शेयर नहीं किए जाते थे, बल्कि दूसरे सोशल मीडिया पेजों से प्रचार किया जाता था। रुटो ने चुनाव जीतकर केन्या के राष्ट्रपति का पद संभाला था। फर्जी अकाउंट और VPN से छिपाते हैं पहचान अल जजीरा के मुताबिक, भारतीय कंसल्टेंसी कंपनियां चुनावी प्रचार के लिए पुराने सोशल मीडिया पेज खरीदती हैं, नए अकाउंट बनाती हैं या पुराने पेजों का नाम बदलकर उनका इस्तेमाल करती हैं। इन पेजों से ऐसे पोस्ट और वीडियो शेयर किए जाते हैं, जिन्हें उम्मीदवार की आधिकारिक टीम अपने अकाउंट से पोस्ट नहीं करना चाहती। मेटा और गूगल के नियमों के मुताबिक, राजनीतिक विज्ञापन देने वालों को अपनी पहचान और विज्ञापन के लिए पैसा देने वाले व्यक्ति या संगठन की जानकारी देनी होती है। मेटा फर्जी पहचान से अकाउंट चलाने और अकाउंट खरीदने-बेचने पर भी रोक लगाता है। हालांकि, भारतीय कंसल्टेंट्स ने अल जजीरा को बताया कि इन नियमों से बचने के लिए VPN का इस्तेमाल किया जाता है। इससे भारत में बैठकर किसी दूसरे देश की लोकेशन दिखाते हुए वहां के लोगों तक राजनीतिक विज्ञापन पहुंचाए जा सकते हैं। हवाला और विदेशी कंपनियों से भेजा जाता है पैसा अल जजीरा के मुताबिक, इन चुनावी अभियानों के लिए मिलने वाले पैसे का लेन-देन भी छिपाकर किया जाता है। कुछ कंसल्टेंट्स ने बताया कि विदेशी कंपनियों के जरिए कागजों पर किसी व्यक्ति को दूसरे काम के लिए नौकरी पर रखा जाता है, लेकिन असल में उसे चुनावी प्रचार का पैसा दिया जाता है। कई कंसल्टेंसी कंपनियां हवाला के जरिए भी रकम भेजती हैं। इसमें बैंक के बजाय अलग-अलग जगहों पर बैठे एजेंटों के जरिए पैसा पहुंचाया जाता है। तीन कंसल्टेंट्स ने दिल्ली के चांदनी चौक के कुछ कारोबारियों को ऐसे लेन-देन का ठिकाना बताया। एक कंसल्टेंट ने अल जजीरा को बताया कि उसने 10 रुपए के नोट के खास सीरियल नंबर के जरिए लाखों रुपए का भुगतान होते देखा था। जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और पड़ोसी देशों में भी काम अल जजीरा के मुताबिक, भारतीय राजनीतिक कंसल्टेंट्स अमेरिका और अफ्रीका के अलावा जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, नेपाल और श्रीलंका में भी चुनावी अभियानों से जुड़े रहे हैं। राजनीतिक कंसल्टेंसी पर किताब लिखने वाले अमोघ धर शर्मा ने अपनी रिसर्च के दौरान जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया में भारतीय कंपनियों के काम करने की जानकारी मिलने की बात कही है। दिल्ली के राजनीतिक कंसल्टेंट तुषार गिरि ने बताया कि भारत में चुनावी प्रचार का अनुभव अब दूसरे देशों के नेताओं को भी आकर्षित कर रहा है। उनके मुताबिक, भारत में कम खर्च पर ऐसे अभियान चलाए जा सकते हैं। केन्या में काम कर रहे दो भारतीय कंसल्टेंट्स की हत्या केन्या में रुटो के चुनावी अभियान के लिए काम कर रहे दो भारतीय कंसल्टेंट्स जुल्फिकार अहमद खान और मोहम्मद जैद सामी किदवई जुलाई 2022 में नैरोबी से लापता हो गए थे। अक्टूबर में उनके शव मिले। आरोप लगे थे कि केन्या की एक विशेष पुलिस यूनिट ने उनका अपहरण किया था। इस मामले में 15 पुलिस अधिकारियों पर हत्या के आरोप लगाए गए। हालांकि, अगस्त 2026 में केन्या के हाईकोर्ट ने सरकारी पक्ष की मांग पर ये आरोप खत्म कर दिए।

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यह पोस्ट सबसे पहले भस्कर डॉट कोम पर प्रकाशित हुआ हमने भस्कर डॉट कोम के सोंजन्य से आरएसएस फीड से इसको रिपब्लिश करा है |

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