Sport : EXPLAINER: टेस्ट क्रिकेट को रोमांचक बनाते हैं उसके ये 10 नियम, जो हर क्रिकेट फैंस को जरूर पता होने चाहिए #INA

Test Cricket Rules: आज के दौर में क्रिकेट 3 फॉर्मेट में खेला जाता है. टेस्ट, वनडे और टी-20… टेस्ट क्रिकेट सबसे पुराना फॉर्मेट है और इसे असली क्रिकेट कहा जाता है. सफेद जर्सी और लाल गेंद से खेले जाने वाले इस फॉर्मेट को क्रिकेट के फैंस काफी ज्यादा पसंद करते हैं. आज भी जब बड़ी टीमों के बीच 5-5 दिनों के टेस्ट मैच होते हैं, तो रोमांच उस स्तर पर पहुंच जाता है कि दर्शकों के लिए पलक झपकाना भी मुश्किल हो जाता है. ये कहना गलत नहीं होगा कि टेस्ट को उसे और भी रोमांचक उसके नियम बनाते हैं, जिसके बारे में आज इस आर्टिकल में आपको बताएंगे. तो आइए जानते हैं टेस्ट क्रिकेट के 10 अहम नियम…

5 दिन का होता है टेस्ट मैच

टेस्ट फॉर्मेट क्रिकेट का सबसे लंबा फॉर्मेट है. एक दिन में 90 ओवर का खेल खेला जाता है, जो बल्लेबाज और गेंदबाजों को खुलकर खेलने का मौका देता है. जी हां, जहां एक ओर लिमिटेड ओवर क्रिकेट में बल्लेबाज आते ही बड़े शॉट्स लगाने को देखते हैं और गेंदबाज रन रोकने को देखते हैं.

लेकिन, टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाजों को सेट होकर अपना खेल खेलने का पूरा समय मिलता है, तो गेंदबाज भी रन रोकने पर नहीं बल्कि विकेट लेने पर पूरा फोकस रखते हैं. अधिकतम 5 दिनों तक खेले जाने वाले इस एक मैच में खिलाड़ियों के पेशेंस का टेस्ट होता है, जो न केवल उन्हें एक बेहतर क्रिकेटर बल्कि एक बेहतर एथलीट भी बनाता है.

दोनों टीमों को मिलती हैं 2-2 पारियां

 

Test Cricket
टेस्ट क्रिकेट Photograph: (Image Source: AI)

 

5 दिन तक खेले जाने वाले टेस्ट क्रिकेट में दोनों टीमों को 2-2 पारियां मिलती हैं. इसमें बल्लेबाजी करने वाली टीम अधिक से अधिक रन बोर्ड पर लगाना चाहती है, तो वहीं गेंदबाजी टीम जल्दी से जल्दी विकेट लेना चाहती है. टेस्ट मैच वही टीम जीतती है, जो सबसे पहले 20 विकेट चटका लेती है. इसीलिए तो टेस्ट में बल्लेबाजों का रन बनाना तो जरूरी होता है, लेकिन गेंदबाजों का विकेट लेना सबसे ज्यादा जरूरी होता है.

टेस्ट में 3 DRS का होता है इस्तेमाल

वनडे और टी-20 फॉर्मेट में एक पारी में टीम को 2 DRS मिलते हैं, जबकि टेस्ट क्रिकेट में ऐसा नहीं है. दरअसल, टेस्ट क्रिकेट में एक मैच में एक टीम 2 पारियां खेलती हैं और हर पारी में टीम को 3-3 डीआरएस मिलते हैं. ऐसे देखा जाए तो एक मुकाबले में एक टीम 6-6 DRS का इस्तेमाल करती हैं, जबकि मैच में टोटल 12 डीआरएस इस्तेमाल होते हैं. यकीन मानिए डिसीजन रिव्यू सिस्टम से टेस्ट क्रिकेट का रोमांच काफी बढ़ जाता है.

ड्रॉ मैच का होता है अलग ही रोमांच

टेस्ट क्रिकेट में मैच में जीत और हार के अलावा एक परिणाम काफी अधिक देखने को मिलता है और वो है ड्रॉ… जी हां, टेस्ट मैच में कई बार ऐसी परिस्थितियां बन जाती हैं, जिसमें टीमों के लिए मैच को ड्रॉ करना भी जीतने के बराबर हो जाता है. वनडे क्रिकेट में जब मैच बराबरी पर खत्म होता है, तो उसे टाई कहते हैं. जबकि टेस्ट क्रिकेट में इसे ड्रॉ कहा जाता है. 

फील्डिंग को लेकर भी अलग है टेस्ट क्रिकेट

टेस्ट क्रिकेट को बाकी दोनों फॉर्मेट्स (वनडे और टी20) से अलग बनाने में फील्डिंग नियम भी अहम भूमिका निभाते हैं. जहां सीमित ओवरों के क्रिकेट में फील्डिंग पर कई तरह की पाबंदियां होती हैं, वहीं टेस्ट क्रिकेट में कप्तान को अपनी रणनीति के अनुसार फील्ड सेट करने की पूरी आजादी मिलती है. यही वजह है कि टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज और कप्तान के बीच मानसिक जंग देखने को मिलती है.

fielding rules in test cricket
टेस्ट क्रिकेट Photograph: (Image Source: AI)

 

टी20 और वनडे में पावरप्ले तथा 30-यार्ड सर्कल के नियम लागू होते हैं, जिसके कारण एक निश्चित संख्या से ज्यादा फील्डर बाउंड्री लाइन पर नहीं खड़े किए जा सकते. लेकिन टेस्ट क्रिकेट में ऐसा कोई नियम नहीं है. कप्तान परिस्थिति और बल्लेबाज की कमजोरी के अनुसार फील्ड सजाता है. टेस्ट क्रिकेट में अक्सर 3 से 5 स्लिप फील्डर देखने को मिलते हैं, जो इस खेल की खूबसूरती को और भी बढ़ाते हैं.

आपसी सहमति से मैच कर देते हैं खत्म

टेस्ट मैच में कई बार दोनों टीमें आपसी सहमति से भी मैच को खत्म कर देती हैं. ऐसा तब ही होता है, जब खेल में ज्यादा वक्त न बचा हो और दोनों ही टीमों को ये महसूस हो जाए कि मैच का नतीजा ड्रॉ ही आएगा. उदाहरण के लिए किसी टीम को जीतने के लिए 500 रन बनाने हो और वक्त बचा हो 1 या दो घंटे का. या फिर किसी टीम को मैच जीतने के लिए पूरे 10 विकेट चाहिए हो और आखिरी सेशन के कुछ आखिरी मिनट बचे हो. गौर करने वाली बात है कि टेस्ट में मिली जीत से नेट रन रेट वगैरह पर कहीं कोई असर नहीं पड़ता है. इसीलिए आपसी सहमति से टीमें मैच को ड्रॉ भी कर लेती हैं.

फॉलो-ऑन का नियम

टेस्ट क्रिकेट का सबसे दिलचस्प नियम फॉलो-ऑन है. यदि पहली पारी के बाद एक टीम दूसरी टीम पर 200 या उससे अधिक रन की बढ़त हासिल कर लेती है, तो कप्तान विपक्षी टीम को दोबारा बल्लेबाजी के लिए बुला सकता है और इसे ही टेस्ट क्रिकेट में फॉलो-ऑन कहा जाता है. हालांकि आज के समय में कई कप्तान इस विकल्प का इस्तेमाल कम करते हैं क्योंकि गेंदबाजों को आराम देना भी जरूरी होता है.

 

Test cricket follow on rule
Test cricket follow on rule Photograph: (Image Source: AI)

 

80 ओवर बाद नई गेंद लेने का मिलता है मौका

टेस्ट क्रिकेट में गेंद पुरानी होने के साथ उसका व्यवहार बदल जाता है. जैसे नई गेंद से अच्छी स्विंग मिलती है, तो वहीं गेंद पुरानी होने पर चमक खो देती है और बल्लेबाजों के लिए रन बनाना आसान हो जाता है. इसलिए टेस्ट क्रिकेट में नियम के अनुसार, फील्डिंग टीम 80 ओवर पूरे होने के बाद नई गेंद लेने का विकल्प चुन सकती है. 80 ओवर के बाद नई गेंद उपलब्ध होती है और कप्तान फिर जब चाहें उसे ले सकता है.

दिन में ही खेला जाता है टेस्ट मैच

वनडे और टी-20 मैच दोपहर या शाम में खेले जाते हैं. मगर, टेस्ट मैच दिन की रौशनी में ही खेला जाता है. इसे फ्लड लाइट के अंडर नहीं खेला जाता है, जो इस खेल की खूबसूरती को और भी अधिक बढ़ाता है. जबकि वनडे और टी-20 फॉर्मेट के साथ ऐसा नहीं है. हालांकि, आपको जानकारी के लिए बता दें कि डे-नाइट टेस्ट मैच भी खेला जाता है, जो पिंक बॉल से खेला जाता है, मगर उन मैचों की संख्या काफी कम हैं.

खराब रौशनी के कारण भी जल्दी खत्म होता है दिन का खेल

जैसा कि हमने आपको बताया कि टेस्ट मैच के एक दिन में 90 ओवर का खेल खेला जा सकता है. मगर, ये परिस्थितियों पर निर्भर करता है. यदि दिन के ओवर पूरे नहीं हुए हैं और रौशनी कम होने लगे, तो मैदान पर मौजूद अंपायर लाइट मीटर का इस्तेमाल करते हैं. यदि रौशनी पैरामीटर के अनुसार नहीं होती है, तब दिन के खेल को खत्म करने का फैसला लिया जाता है. मगर, इसमें भी एक मतभेद है कि, जो टीम बैटिंग कर रही है, यदि वो चाहे तो स्पिनर्स के साथ बैटिंग करना जारी रख सकती है. लेकिन, फील्डिंग टीम अगर कहती है कि उसे पेसर से बॉलिंग करानी है, तो फिर दिन के खेल को वहीं पर रोक दिया जाता है.

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