Sport : Explainer: नया जोश या पुराना तजुर्बा? जानिए क्रिकेट टीमें क्यों बार-बार लौटती हैं अपने पूर्व कप्तानों के पास #INA

बात चाहे क्रिकेट की हो या किसी दूसरे खेल की, मैदान पर अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता. यही वजह है कि टीम मैनेजमेंट हमेशा अनुभवी खिलाड़ियों को प्राथमिकता देता है. कई बार क्रिकेट बोर्ड अपने पुराने और आजमाए हुए कप्तानों पर दोबारा भरोसा जताते हुए उन्हें फिर से कप्तानी की जिम्मेदारी सौंप देते हैं, ताकि उनके लंबे अनुभव से टीम को फायदा हो. हालिया उदाहरण देखें तो इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने एक बार फिर से जो रूट को टेस्ट का कप्तान बनाया है. बता दें कि रूट कई सालों तक इंग्लैंड की टेस्ट की कमान संभाल चुके हैं. तो चलिए इस आर्टिकल में समझते हैं कि आखिर क्यों पुराने कप्तानों पर टीमें फिर से दांव लगाती हैं.
BREAKING: Joe Root returns as England’s Test captain under new head coach Stephen Fleming 🏴
Root has previously captained England in 65 Tests, serving from 2017-2022 and on an interim basis against New Zealand at The Oval earlier this summer pic.twitter.com/XtHai0Zggh
— Cricinfo (@cricinfo) July 30, 2026
कप्तानों के रिटायरमेंट के बाद पुराने अनुभव पर दांव लगाना
किसी टीम का मौजूदा कप्तान अगर रिटायरमेंट ले लेता है, या फिर वह अपने पद को छोड़ देता है, ऐसे में टीम मैनेजमेंट या तो किसी नए खिलाड़ी को कप्तानी सौंपता है या फिर अपने सबसे अनुभवी खिलाड़ी का रुख करता है, जिसके पास कप्तानी का भी अनुभव होता है. बेन स्टोक्स के रिटायरमेंट के बाद इंग्लैंड को टेस्ट कप्तान की जरूरत थी. ऐसे में इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने अपने सबसे अनुभवी बल्लेबाज, जो कप्तानी भी कर चुके हैं, जो रूट पर फिर से दांव लगाया है और उन्हें कप्तान बनाया है.
संकट प्रबंधन और तात्कालिक स्थिरता
जब किसी टीम का प्रदर्शन लगातार गिरता जा रहा हो, या फिर ड्रेसिंग रूम का माहौल खराब हो चुका हो और टीम मैनेजमेंट के पास कुछ नया प्रयोग करने का समय नहीं होता है, तब वह टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ी, जो कप्तानी के दबाव से गुजर चुका होता है, उसे फिर से कप्तानी की जिम्मेदारी सौंप देता है. मैनेजमेंट किसी युवा खिलाड़ी को कप्तान नहीं बनाता, क्योंकि वह दबाव में बिखर सकता है. जबकि एक पुराना कप्तान पहले भी ऐसे कठिन दौर से गुजर चुका होता है. ऐसे में उसके पास इन सभी दबावों को झेलने की आदत होती है. इतना ही नहीं, पूर्व कप्तान जानते हैं कि मीडिया के तीखे सवालों, फैंस की नाराजगी और बोर्ड के दबाव को कैसे संभालना है. एक नए कप्तान को अपनी रणनीति लागू करने में समय लगता है, जबकि पुराने कप्तान के पास पहले से ही एक सेट फॉर्मूला होता है, जिससे टीम का प्रदर्शन जल्द सुधर सकता है.
ड्रेसिंग रूम में सम्मान और ‘कमांड’ की बहाली
कोई टीम कितनी सफल होगी, यह उसके ड्रेसिंग रूम का अनुशासन और एकजुटता बताती है. कई बार युवा कप्तानों और सीनियर खिलाड़ियों के बीच मतभेद पैदा हो जाते हैं, लेकिन वहीं अगर एक पुराना कप्तान होता है, तो जूनियर से लेकर सीनियर खिलाड़ी तक सभी उनकी बात का सम्मान करते हैं. उनके आते ही टीम के ड्रेसिंग रूम की गुटबाजी या असंतोष तुरंत शांत हो जाता है. जब किसी बोर्ड के पास युवा नेतृत्व के लिए कोई बेहतर विकल्प नहीं होता है, तो फिर वह पुराने कप्तान के पास वापस जाना बेहतर समझता है. इससे बाकी और युवा खिलाड़ियों के बीच ईर्ष्या या प्रतिस्पर्धा की भावना खत्म होती है.
दबाव वाले मैचों और बड़े टूर्नामेंटों का अनुभव
द्विपक्षीय सीरीज जीतना एक बात है, लेकिन आईसीसी टूर्नामेंट, एशिया कप और आईपीएल का खिताब जीतना अलग बात होती है. इनमें काफी दबाव होता है, जो किसी युवा कप्तान के लिए आसान नहीं होता है. पुराने कप्तानों के पास खेल की परिस्थितियों को पढ़ने का सालों का अनुभव होता है. वे जानते हैं कि कब रक्षात्मक होना है और कब आक्रामक होकर खेलना है. पुराने कप्तान पहले की गई अपनी और टीम की गलतियों से काफी कुछ सीख चुके होते हैं. बड़े मंच पर उनका यह अनुभव टीम को पैनिक होने से बचाता है.
ब्रांड वैल्यू, प्रायोजक और फैंस का भरोसा
आधुनिक क्रिकेट अब सिर्फ मैदान पर प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह एक बहुत बड़ा बिजनेस बन चुका है. खासकर आईपीएल जैसी टी20 लीगों में कॉर्पोरेट हित बहुत मायने रखते हैं. वहीं एक पुराने और पॉपुलर पूर्व कप्तान की वापसी से फैंस में नया उत्साह भर जाता है. मैचों की टिकट की प्राइस से लेकर व्यूअरशिप तक भी बढ़ जाती है. वहीं ब्रांड्स हमेशा एक भरोसेमंद चेहरे पर निवेश करना चाहते हैं. पुराने कप्तान की वापसी से टीम की ब्रांड वैल्यू स्थिर रहती है, जिससे प्रायोजकों का भरोसा टीम पर बना रहता है.
युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन
कई बार टीम मैनेजमेंट पुराने कप्तान को ज्यादा समय के लिए नहीं, बल्कि एक बदलाव के दौर को संभालने के लिए लाता है. मैनेजमेंट पुराने कप्तान को इसलिए वापस लाता है ताकि वह मैदान पर रहते हुए किसी युवा खिलाड़ी को कप्तानी के लिए तैयार कर सके. जब पुराना कप्तान कमान संभालता है, तो युवा खिलाड़ी बिना किसी अतिरिक्त कप्तानी के दबाव के अपने स्वाभाविक खेल पर फोकस करते हैं.
यह भी पढ़ें: Explainer: आखिरकार क्यों लिया अजिंक्य रहाणे ने संन्यास? इन 5 प्वाइंट्स से मिल जाएगा आपको जवाब
जब ‘नया प्रयोग’ पूरी तरह विफल हो जाए
अक्सर टीमें जल्दबाजी में आगे के भविष्य के लिए किसी युवा खिलाड़ी को कप्तान बना देती हैं, लेकिन जब वह कप्तानी का दबाव नहीं झेल पाता है और टीम उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाती है, तो फिर टीम मैनेजमेंट अपने पुराने कप्तान की ओर देखता है. बोर्ड पुराने कप्तान को कमान सौंप देता है, क्योंकि उनके नेतृत्व में असफलता का जोखिम नए खिलाड़ी की तुलना में कम होता है. यानी कुल मिलाकर पुराने कप्तान को वापस कमान सौंपने से टीम की मुश्किलें कम होती हैं. उनका अनुभव टीम के काम आता है. मैनेजमेंट को ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं पड़ती है. खेल का इतिहास गवाह है कि जब-जब टीमें संकट से गुजरी हैं, उन्होंने अपने पुराने नेतृत्व को याद किया है और भरोसा जताया है. उन्हें अक्सर सकारात्मक परिणाम ही मिले हैं.
यह भी पढ़ें: CSK के पूर्व कोच को इंग्लैंड टीम में मिली बड़ी जिम्मेदारी, ब्रैंडन मैक्कुलम की लेंगे जगह, जो रूट बने कप्तान
Explainer: नया जोश या पुराना तजुर्बा? जानिए क्रिकेट टीमें क्यों बार-बार लौटती हैं अपने पूर्व कप्तानों के पास
देश दुनियां की खबरें पाने के लिए ग्रुप से जुड़ें,
#INA #INA_NEWS #INANEWSAGENCY
Copyright Disclaimer :->/b>Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on newsnationtv.com, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,