खबर शहर , UP: चार गवाह, 13 घायलों के मेडिकल…फिर भी नहीं साबित हुए आरोप; अदालत में नहीं टिकी पुलिस की कहानी – INA

आगरा में हत्या की कोशिश, 7 क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट व अन्य अलग-अलग और 10 धाराओं में दर्ज हुए मामले में पुलिस की कहानी अदालत में नहीं चल सकी। अभियोजन पक्ष कोई साक्ष्य पेश नहीं कर सका। एडीजे-8 रविकांत ने थाना ताजगंज के गांव बहेटा निवासी 10 आरोपियों को सभी आरोपों से दोषमुक्त दिया, जबकि पुलिस ने साक्ष्य के तौर पर 13 घायलों को मेडिकल भी लगाया था।
थाना ताजगंज में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, दरोगा प्रदीप कौशिक ने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि 20 जून, 2020 को उन्हें 112 नंबर से सूचना मिली थी कि गांव बहेटा में दो पक्षों में विवाद हो रहा है। वह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। देखा तो ऋषि के मकान के पास दो पक्ष एक-दूसरे को जान से मारने की नीयत से लाठी, डंडों से मारपीट कर रहे थे। पथराव भी किया जा रहा था। गांव के लोगों ने अपने-अपने घरों के दरवाजे बंद कर लिए थे। पुलिस ने एक पक्ष से सुरेंद्र, दिनेश, शिशुपाल, रामू, तपेंद्र, जैकी, सपना और दूसरे पक्ष से भीकम, कुलदीप, छोटे, राजकुमार, मंगल सिंह, सुखवंती व 15 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। 13 घायलों का मेडिकल कराया।
विवेचक ने विवेचना के बाद विवेचक ने दिनेश, सपना और सुखवंती के नाम निकालकर 10 आरोपियों के खिलाफ 18 अगस्त को अदालत में आरोपपत्र प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष की तरफ से दरोगा और डॉक्टर सहित चार गवाह अदालत में पेश किए गए। बचाव पक्ष से दो गवाह पेश किए गए। उन्होंने अदालत में बताया कि घटना के समय लॉकडाउन चल रहा था। गांव के लोग अपने-अपने घरों के बाहर बैठे थे। उस दौरान पुलिस गश्त पर आई थी। पुलिसकर्मी लोगों को घरों के बाहर बैठा देख गाली-गलौज देने लगे। विरोध पर मारपीट की। मोबाइल फोन तोड़ दिए। घायलों को जो चोटें आईं थीं वह पुलिस के पीटने से आईं थीं।