सर्बिया में पुतिन समर्थक राष्ट्रपति वुचिच की हार:छात्र गठबंधन ने चुनाव जीता; तानाशाही रवैये के खिलाफ दो साल से प्रदर्शन चल रहे थे- INA NEWS

रूस के राष्ट्रपति पुतिन के करीबी माने जाने वाले सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। करीब दो साल से उनके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के गठबंधन ‘स्टूडेंट लिस्ट’ ने चुनाव जीत लिया है। छात्र भ्रष्टाचार और सरकार के तानाशाही रवैये के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। वुचिच के मुताबिक, छात्रों के गठबंधन को संसद की 250 में से कम से कम 135 सीटें मिली हैं, जबकि उनकी पार्टी को करीब 105 सीटें मिलने का अनुमान है। वुचिच 2012 से सर्बिया की राजनीति के सबसे ताकतवर नेताओं में शामिल रहे हैं। वे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, दोनों पदों पर रह चुके हैं। वुचिच के हार मानते ही राजधानी बेलग्रेड में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। ज्यादातर युवा थे। लोगों ने सर्बिया के झंडे लहराए, गाड़ियों के हॉर्न बजाए और पटाखे जलाकर जश्न मनाया। वुचिच की हार के बाद जश्न की 3 तस्वीरें नवंबर 2024 में हुए हादसे के बाद शुरू हुआ आंदोलन नवंबर 2024 में नोवी साद शहर के एक रेलवे स्टेशन की छतरी गिर गई थी। इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद लोगों का गुस्सा बढ़ गया। सवाल उठने लगे कि सुरक्षा के इंतजामों में लापरवाही क्यों हुई और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। लोगों ने सरकार पर भ्रष्टाचार और जवाबदेही से बचने के आरोप लगाए। धीरे-धीरे छात्र आंदोलन बड़ा होता गया। प्रदर्शनकारी सरकार में बदलाव की मांग करने लगे। उन्होंने वुचिच से पद छोड़ने की भी मांग की। छात्रों के लगातार प्रदर्शनों के दबाव में वुचिच ने सितंबर में तय समय से पहले चुनाव कराया था। रिकॉर्ड मतदान, लेकिन सरकार बनाना बड़ी चुनौती चुनाव में करीब 70% लोगों ने वोट डाले। सर्वे एजेंसियों और चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 1992 में यूगोस्लाविया के टूटने के बाद यह सबसे ज्यादा मतदान है। चुनाव जीतने के बाद भी स्टूडेंट लिस्ट के सामने कई चुनौतियां हैं। अभी यह साफ नहीं है कि नई सरकार का नेतृत्व कौन करेगा और छात्र आंदोलन अपने वादों को कैसे पूरा करेगा। स्टूडेंट लिस्ट में 250 उम्मीदवार हैं। इनमें विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, अभिनेता और किसान शामिल हैं। इसके कई उम्मीदवार राष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा चर्चित नहीं हैं। सूची का नेतृत्व हृदय रोग विशेषज्ञ इलिया सर्दानोविच कर रहे हैं। आंदोलन ने भ्रष्टाचार पर रोक लगाने, कानून का पालन सुनिश्चित करने और शिक्षा व्यवस्था सुधारने का वादा किया है। लेकिन नई कैबिनेट में कौन-कौन होगा और सरकार कैसे चलेगी, यह अभी तय नहीं है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, नई सरकार पर सरकारी संस्थाओं में सुधार का दबाव रहेगा। इसमें पुलिस, सुरक्षा एजेंसियों और मंत्रालयों में बदलाव शामिल हो सकते हैं। चीन, रूस और यूरोपीय संघ के बीच संतुलन बनाना होगा नई सरकार के सामने विदेश नीति की भी चुनौती होगी। सर्बिया को चीन, रूस और यूरोपीय संघ के साथ अपने रिश्तों को संभालना होगा। चीन सर्बिया में बड़ा निवेश करता है। रूस उसका पुराना सहयोगी है और उसे प्राकृतिक गैस भी देता है। वहीं, यूरोपीय संघ सर्बिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। नई सरकार को इन तीनों के साथ रिश्ते बनाए रखते हुए अपने फैसले लेने होंगे। यूरोपीय नेताओं ने जीत का स्वागत किया यूरोपीय नेताओं और अधिकारियों ने स्टूडेंट लिस्ट की जीत का स्वागत किया है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन ने कहा कि यूरोपीय संघ, सर्बिया को अपनी सदस्यता की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करने के लिए उसके साथ काम करने को तैयार है। यूरोपीय संघ की विस्तार आयुक्त मार्ता कोस ने भी चुनाव नतीजों का स्वागत किया। इस जीत का असर सर्बिया के बाहर भी दिख सकता है। यूरोप के कई देशों में छात्र शिक्षा, रोजगार के मौके और सरकार के कामकाज जैसे मुद्दों पर प्रदर्शन कर चुके हैं। अब स्टूडेंट लिस्ट के सामने सबसे बड़ी चुनौती चुनाव में मिली जीत को ऐसी सरकार में बदलना है, जो काम कर सके। उसे भ्रष्टाचार पर रोक लगाने और सरकारी संस्थाओं पर लोगों का भरोसा लौटाने के अपने वादे पूरे करने होंगे। —————————– ये खबर भी पढ़ें… ब्राजील में लूला चौथी बार राष्ट्रपति बने: बोल्सोनारो से पहले राउंड में पिछड़ने के बाद जीते; 2022 में इनके पिता को हराया था ब्राजील में 80 साल के लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने चौथी बार राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है। वे पहले दौर की वोटिंग में फ्लावियो बोल्सोनारो से पिछड़ गए थे, लेकिन दूसरे दौर में बाजी पलट दी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Table of Contents

Source link
यह पोस्ट सबसे पहले भस्कर डॉट कोम पर प्रकाशित हुआ हमने भस्कर डॉट कोम के सोंजन्य से आरएसएस फीड से इसको रिपब्लिश करा है |

Back to top button
Close
Crime
Social/Other
Business
Political
Editorials
Entertainment
Festival
Health
International
Opinion
Sports
Tach-Science
Eng News