जंतर-मंतर आंदोलन में शामिल होने पर असिस्टेंट प्रोफेसर निष्कासित:समाजवादी युवजनसभा के जिलाध्यक्ष डॉ. मोहित भारद्वाज बोले- बच्चों के हक़ के लिए लड़ने पर हुई कार्यवाही- INA NEWS

दिल्ली के जंतर मंतर पर पेपर लीक को लेकर हो रहे छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होने पर बरेली के एक असिस्टेंट प्रोफेसर की सेवाएं समाप्त कर दी गई है। उन्हें न कोई नोटिस दिया गया न ही सस्पेंड किया गया बल्कि उन्हें सीधे निष्काषित कर दिया गया। उनका कसूर सिर्फ इतना था क्योंकि वो छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो गए थे। बहेड़ी के कॉलेज शिक्षक बोले- बिना नोटिस और जांच के सेवा समाप्त की, कार्रवाई को बताया राजनीतिक प्रतिशोध
बरेली के बहेड़ी गन्ना उत्पादक महाविद्यालय, बहेड़ी के असिस्टेंट प्रोफेसर (वाणिज्य) और समाजवादी युवजनसभा के जिलाध्यक्ष डॉ. मोहित भारद्वाज ने आरोप लगाया है कि नई दिल्ली के जंतर-मंतर में आयोजित छात्र आंदोलन में शामिल होने के कारण उन्हें राजनीतिक दुर्भावना के तहत महाविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया। उन्होंने इस कार्रवाई को नियमों के विरुद्ध बताते हुए निष्पक्ष जांच और निष्कासन आदेश की समीक्षा की मांग की है। दो साल से थे कार्यरत, बिना नोटिस हटाने का आरोप
डॉ. मोहित भारद्वाज का कहना है कि वह पिछले करीब दो वर्षों से गन्ना उत्पादक महाविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। उनके अनुसार इस दौरान न तो उनके खिलाफ कोई विभागीय जांच हुई और न ही कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इसके बावजूद सीधे सेवा समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया गया। जंतर-मंतर आंदोलन में शामिल होने के बाद हुई कार्रवाई
डॉ. भारद्वाज के मुताबिक वह 18 से 20 जुलाई तक नई दिल्ली के जंतर-मंतर में आयोजित छात्र आंदोलन में शामिल हुए थे। उनका आरोप है कि आंदोलन से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद महाविद्यालय प्रबंधन ने राजनीतिक आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की। प्रबंधन पर राजनीतिक आधार पर कार्रवाई का आरोप
डॉ. भारद्वाज ने आरोप लगाया कि गन्ना उत्पादक महाविद्यालय का संचालन गन्ना समिति के अधीन होता है और समिति के अध्यक्ष ही महाविद्यालय के प्रबंधन से जुड़े हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक विचारधारा के कारण उन्हें निशाना बनाया गया और लोकतांत्रिक आंदोलन में भाग लेने की कीमत नौकरी गंवाकर चुकानी पड़ी। वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं करने का दावा
डॉ. भारद्वाज का कहना है कि सहायता प्राप्त (एडेड) महाविद्यालय में किसी शिक्षक की सेवा समाप्त करने से पहले कारण बताओ नोटिस, स्पष्टीकरण का अवसर, विभागीय जांच और आवश्यक विश्वविद्यालयीय अनुमोदन जैसी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए। उनका दावा है कि उनके मामले में इनमें से किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। निष्पक्ष जांच और आदेश की समीक्षा की मांग
डॉ. भारद्वाज ने इस कार्रवाई को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच, निष्कासन आदेश की वैधानिक समीक्षा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन में भाग लेना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और केवल वैचारिक या राजनीतिक आधार पर किसी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई किया जाना गंभीर विषय है।
उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका और प्रशासन पर पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर उन्हें न्याय मिलेगा।

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यह पोस्ट सबसे पहले भस्कर डॉट कोम पर प्रकाशित हुआ हमने भस्कर डॉट कोम के सोंजन्य से आरएसएस फीड से इसको रिपब्लिश करा है |

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