पहले वीडियो बनाया, फिर फंदे पर झूल गया इंजीनियर प्रद्युम्न जिले में मचा कोहराम
जिंदगी से हार गया इंजीनियर: मौत से पहले बनाया वीडियो, पत्नी पर लगाए आरोप, घर पहुंचा शव तो फूट पड़ा दर्द

रिपोर्ट : संजय चाणक्य, कुशीनगर। जिस बेटे की कामयाबी पर परिवार सीना चौड़ा कर चलता था, शुक्रवार शाम उसी बेटे का शव जब घर पहुंचा तो मोहल्लेवासियो के आखों से आंसू छलक पड़ा। नगर पालिका परिषद कुशीनगर के स्वामी विवेकानंद नगर मुहल्ले (बेलवा पलकधारी सिंह) में उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब भोपाल की ऑटोमोबाइल कंपनी में इंजीनियर रहे 33 वर्षीय प्रद्युम्न यादव उर्फ चेतन का शव पोस्टमार्टम के बाद घर लाया गया। मां बेटे के शव से लिपटकर बिलखती रही, पिता की आंखें पत्थरा गईं और आसपास खड़े लोगों की आंखें नम हो उठीं।
बताया जा रहा है कि गुरुवार शाम गोरखपुर के कुसम्हीं जंगल स्थित बुढ़िया माता मंदिर के पास प्रद्युम्न ने गमछे के सहारे फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। लेकिन मौत से पहले उसने जो किया, वह पूरे मामले को और दर्दनाक बना दिया। प्रद्युम्न ने मोबाइल फोन से एक वीडियो रिकॉर्ड किया और उसे सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। वीडियो में वह बेहद टूटा हुआ नजर आया। उसने कहा कि वह जिंदगी से हार चुका है और अपनी मौत के लिए पत्नी को जिम्मेदार ठहरा रहा है। वीडियो वायरल होते ही इलाके में सनसनी फैल गई। परिजनों के मुताबिक शादी के बाद शुरुआती दिनों में सबकुछ ठीक था, लेकिन धीरे-धीरे पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ने लगा। रिश्तों में शक और तनाव की दीवार इतनी ऊंची हो गई कि पत्नी अपनी बेटी को लेकर मायके में रहने लगी। परिवार वालों का कहना है कि पत्नी से अलगाव के बाद प्रद्युम्न अंदर ही अंदर घुटने लगा था। बाहर से नौकरी और जिंदगी सामान्य दिख रही थी, लेकिन भीतर उसका मन टूट चुका था।
मृतक के बड़े भाई राघवेंद्र यादव ने बताया कि परिवार अभी गहरे सदमे में है और फिलहाल अंतिम संस्कार की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि अभी पुलिस को कोई तहरीर नहीं दी गई है। परिवार के लोग आपस में सलाह-मशविरा कर आगे का निर्णय लेंगे। वहीं पुलिस का कहना है कि तहरीर मिलने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
🔴मेहनत से बना इंजीनियर, लेकिन रिश्तों की टूटन ने छीन ली जिंदगी
सिसवा महंथ क्षेत्र निवासी प्रद्युम्न यादव ने संघर्षों के बीच पढ़ाई पूरी कर इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी। भोपाल की एक बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी में नौकरी लगने के बाद परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं। गांव के युवाओं के लिए वह प्रेरणा बन चुका था। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि हंसता-मुस्कुराता दिखने वाला यह युवक भीतर से इतना टूट चुका है।
करीबी बताते हैं कि पिछले कुछ महीनों से प्रद्युम्न काफी तनाव में रहने लगा था। वह कम बोलता था और अक्सर अकेले रहता था। पारिवारिक तनाव और रिश्तों में बढ़ती दूरी ने धीरे-धीरे उसका आत्मविश्वास खत्म कर दिया। आखिरकार जिंदगी की इस जंग में वह हार गया और पीछे छोड़ गया रोता-बिलखता परिवार।






