चकबंदी के मुकदमे में मनमाफिक फैसला कराने के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार पेशकार नूर मोहम्मद को अदालत से राहत नहीं मिली। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मृदुल दुबे ने जमानत खारिज कर दी। आरोपी 16 अक्तूबर, 2026 से जिला कारागार में निरुद्ध है।
रामकुमार ने शिकोहाबाद तहसील स्थित बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी की अदालत में मुकदमा दायर किया था। आरोप लगाया था कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ने डेढ़ लाख रुपये लेकर उसके पक्ष में फैसला सुनाया था। बाद में विपक्षी ने रेस्टोरेशन प्रार्थनापत्र प्रस्तुत कर दिया। इसी दौरान बंदोबस्त अधिकारी के पेशकार नूर मोहम्मद ने रामकुमार से संपर्क किया। उसने कहा कि मामले में बंदोबस्त अधिकारी के लिए तीन लाख और उसके लिए 30 हजार रुपये देने होंगे, अन्यथा फैसला दूसरी पार्टी के पक्ष में हो जाएगा।
परेशान वादी ने इसकी शिकायत विजिलेंस से कर दी। शिकायत की जांच के बाद निरीक्षक रिपुदमन सिंह ने ट्रैप की योजना बनाई। वादी को दिए जाने वाले नोटों पर फिनॉफ्थलीन पाउडर लगाया गया। वरिष्ठ सहायक डीपीआरओ कार्यालय फिरोजाबाद अश्वनी देशमुख और कनिष्ठ सहायक कलेक्ट्रेट फिरोजाबाद महेंद्र सिंह की मौजूदगी में विजिलेंस टीम ने जाल बिछाया। पेशकार नूर मोहम्मद को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ हिरासत में लिया था। 16 अक्तूबर, 2026 को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत में पेश किया था। तभी से वह जेल में बंद है।