Technology, अब डूमस्क्रॉलिंग पर लगेगी लगाम: इस देश में किशोरों के लिए आ रहा है नया कानून; जानें कैसे होगा प्रभावी — INA

देर रात तक सोशल मीडिया स्क्रॉल करने की आदत बच्चों और किशोरों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर काफी नकारात्मक असर डाल रही है। इसी को देखते हुए यूके सरकार 16 और 17 साल के किशोरों के लिए सोशल मीडिया एप्स पर

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लागू करने की योजना बना रही है। इसका उद्देश्य किशोरों को बेहतर नींद दिलाना, पढ़ाई पर उनका फोकस बढ़ाना और मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाना है।

हालांकि, अब यहां भी देखना होगा कि योजना लागू होने के बाद यह कितनी प्रभावी साबित होती है। दुनिया के कई देशों की सरकारें बच्चों और किशोरों को सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से दूर रखने के लिए लगातार सख्त कदम उठा रही हैं, लेकिन इन्हें पूरी तरह लागू करना अब भी चुनौती बना हुआ है। इसका ताजा उदाहरण ऑस्ट्रेलिया है, जहां सोशल मीडिया पर प्रतिबंध संबंधी सख्त कदमों के बावजूद कई किशोर कथित तौर पर YouTube Shorts और Instagram Reels जैसी सेवाओं का इस्तेमाल करते हुए देर तक स्क्रॉल करते पाए गए।

UK Teen Social Media Rules: 16 और 17 साल के किशोरों के लिए क्या बदलेगा?


  • रॉयटर्स के अनुसार, यह योजना लागू होने के बाद 16 और 17 साल के यूजर्स के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आधी रात से सुबह छह बते तक डिफॉल्ट रूप से बंद कर दिया जाएगा। हालांकि अगर कोई यूजर चाहे तो इस सेटिंग को बदल भी सकता है।

  • सरकार चाहती है कि किशोर देर रात तक स्क्रीन पर समय बिताने के बजाय पर्याप्त नींद लें और दिन में पढ़ाई और अन्य गतिविधियों पर बेहतर ध्यान दे सकें।

ऑटोप्ले वीडियो भी होंगे बंद


  • इतना ही नहीं यह योजना केवल रात के समय एक्सेस सीमित करने तक ही सीमित नहीं है। प्रस्ताव के अनुसार सोशल मीडिया कंपनियों को ऑटोप्ले वीडियो जैसी सुविधाएं भी डिफॉल्ट रूप से बंद करनी होंगी।

  • सरकार का मानना है कि लगातार अपने आप वीडियो चलने और अनंत स्क्रॉलिंग जैसी सुविधाएं यूजर्स को लंबे समय तक ऑनलाइन बनाए रखती हैं। इन फीचर्स पर रोक लगने से डूमस्क्रॉलिंग की आदत कम करने में मदद मिल सकती है।

इस योजना की आखिर जरूरत ही क्यों पड़ी?


  • यूके सरकार का कहना है कि आजकल बचपन से ही बच्चे सोशल मीडिया के आदी होते जा रहे हैं। वहीं, 16 साल की उम्र पूरी होते-होते ही सोशल मीडिया तक उनकी ज्यादा खुली पहुंच मिल जाती है।

  • इस बदलाव को अधिकारियों ने क्लिफ एज की स्थिति बताया है, जहां अचानक बढ़ी डिजिटल स्वतंत्रता देर रात स्क्रीन टाइम को बढ़ा सकती है।

  • सरकार का मानना है कि इस उम्र के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने से अत्यधिक स्क्रीन इस्तेमाल से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

टेक्नोलॉजी मंत्री ने क्या कहा?

यूके की टेक्नोलॉजी मंत्री लिज केंडल के अनुसार, इन उपायों का उद्देश्य युवाओं की रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बनाना है। उन्होने कहा कि इससे किशोरों को पर्याप्त नींद मिलेगी, स्कूल और कॉलेज पर बेहतर फोकस रहेगा और परिवार व दोस्तों के साथ ज्यादा गुणवत्तापूर्ण समय बिताने का मौका मिलेगा।

यह नया नियम कब तक लागू होगा?

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, नियमों का पहला मसौदा इसी साल के अंत तक संसद में पेश किया जाएगा। अगर इसे मंजूरी मिल जाती है तो नए नियमों के वसंत 2027 से लागू होने की उम्मीद है। हालांकि सरकार का यह भी कहना है कि कानून बनने के बाद इसके प्रभावी और सख्त पालन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

ट्रायल में क्या नतीजे मिले?

यह प्रस्ताव ब्रिटेन में किए गए सरकार समर्थित ट्रायल के बाद सामने आया है। ट्रायल के दौरान पाया गया कि सोशल मीडिया के सीमित इस्तेमाल से किशोरों की एकाग्रता, नींद और समग्र वेलबीइंग में सुधार देखने को मिला। इन्हीं परिणामों के आधार पर सरकार अब इस व्यवस्था को बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी कर रही है।

दूसरे देशों के अनुभव भी बने चर्चा का विषय

इस दौरान ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर कई देश में नए नियम बन रहे हैं, कहीं-कहीं तो बैन जैसे नियम लागू भी हो गए हैं, लेकिन इसके बाद कुछ अध्ययन में देखा गया कि बैन के बावजूद टीनएर्ज सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें टेक कंपनियों की भी बड़ी खामी सामने आई है।

ऑस्ट्रेलिया, जिसने बच्चों के लिए राष्ट्रव्यापी सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है, वहां आयु सत्यापन सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। 

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