Technology, Laptop Lifespan: क्या लैपटॉप की भी होती है एक्सपायरी डेट? जानिए कितने साल बाद बदलना माना जाता है सही फैसला — INA

आज के समय में लैपटॉप हमारा चलता फिरता काम हो गया है। यह सिर्फ एक गैजेट नहीं, बल्कि पढ़ाई, ऑफिस और रोजमर्रा के काम का अहम हिस्सा बन चुका है। कॉलेज असाइनमेंट तैयार करना हो, ऑनलाइन मीटिंग अटेंड करनी हो या फिर ऑफिस का काम पूरा करना हो, हर जगह लैपटॉप की जरूरत पड़ती है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या लैपटॉप की भी कोई एक्सपायरी डेट होती है? भले ही इस पर खाने-पीने की चीजों की तरह कोई एक्सपायरी डेट नहीं लिखी होती, लेकिन हर लैपटॉप की एक तय लाइफ जरूर होती है।
आखिर कितने साल तक चलता है लैपटॉप?
कभी कोई कंपनी आमतौर पर इसकी निश्चित लाइफ नहीं बताती , लेकिन सामान्य तौर पर माना जाता है कि एक लैपटॉप शुरुआती 3 से 5 साल तक बेहतरीन प्रदर्शन करता है। इसके बाद हार्डवेयर पुराना होने लगता है और नए सॉफ्टवेयर की जरूरतों के साथ तालमेल बैठाना मुश्किल हो सकता है।
बदलने के क्या संकेत होते है?
लैपटॉप की सुरक्षा के लिए समय-समय पर ऑपरेटिंग सिस्टम के अपडेट मिलना जरूरी माना जाता है। अगर कंपनी आपके डिवाइस के लिए नए अपडेट और सिक्योरिटी पैच देना बंद कर देती है, तो इसका मतलब है कि डिवाइस अब पुराने (Obsolete) उत्पादों की श्रेणी में पहुंच चुका है। कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ऐसी स्थिति में साइबर हमलों का खतरा बढ़ सकता है।
बार-बार रिपेयर पर खर्च बढ़ने लगे
अगर आपका लैपटॉप पांच साल या उससे ज्यादा पुराना है और बार-बार खराब होने लगा है, तो हर बार रिपेयर पर खर्च करना समझदारी नहीं हो सकती। जब मरम्मत की लागत लगातार बढ़ने लगे, तो नया लैपटॉप खरीदना अधिक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
मल्टीटास्किंग में होने लगे परेशानी
अगर पहले आसानी से चलने वाला लैपटॉप अब कई एप एक साथ खोलने पर स्लो हो जाता है, बार-बार हैंग करता है या सामान्य काम में भी समय लेने लगा है, तो यह उसकी उम्र बढ़ने का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में सिस्टम बदलने पर विचार करना चाहिए।
क्या हर पुराने लैपटॉप को बदलना जरूरी है?
नहीं, ऐसा जरूरी नहीं है कि हर पुराना लैपटॉप तुरंत बदल दिया जाए। अगर डिवाइस को अभी भी सिक्योरिटी अपडेट मिल रहे हैं, सामान्य काम बिना परेशानी के हो रहे हैं और रिपेयर का खर्च कम है, तो उसका इस्तेमाल जारी रखा जा सकता है, लेकिन अगर अपडेट बंद हो जाएं, परफॉर्मेंस लगातार गिरने लगे और रखरखाव महंगा पड़ने लगे, तो नया सिस्टम लेना बेहतर फैसला हो सकता है।