Technology, बाइनेंस हैक: कैसे एक लैपटॉप से हुआ दुनिया का सबसे बड़ा साइबर अटैक? 60,000 करोड़ के क्रिप्टो एसेट्स दांव पर – Binance Crypto Hack Explained 6 Billion Usd Assets At Risk What It Means For Users — INA

सार
Binance Cyber Attack: दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बाइनेंस (Binance) पर इतिहास का सबसे बड़ा साइबर अटैक हुआ है। एक डेवलपर के हैक हुए लैपटॉप की वजह से करीब 6.3 बिलियन डॉलर की क्रिप्टो एसेट्स दांव पर लग गई हैं। हैक के बाद कंपनी ने सभी लेन-देन रोक दिए हैं। हालांकि, बाइनेंस ने ग्राहकों को नुकसान की 100% भरपाई का भरोसा दिया है। आइए जानते हैं इस महा-हैक को कैसे अंजाम दिया गया।
अक्टूबर का महीना साइबर सुरक्षा के लिए एक बुरे सपने की तरह साबित हो रहा है। इस बार हैकर्स ने दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बाइनेंस (Binance) को निशाना बनाया है। इस साइबर अटैक ने पूरी क्रिप्टो इंडस्ट्री में खौफ पैदा कर दिया है, क्योंकि इस बार हैकरों के हाथ में क्रिप्टो मार्केट के 6.3 बिलियन डॉलर (करीब 60,000 करोड़ रुपये) लग गए हैं। यह 2025 में बायबिट (Bybit) पर हुए 1.5 बिलियन डॉलर के हैक को पछाड़कर इतिहास का सबसे बड़ा साइबर अटैक बन गया है।
पूरी दुनिया के साइबर एक्सपर्ट्स इस हैक को देखकर इसलिए हैरान हैं, क्योंकि यह किसी बाहरी सिस्टम की कमजोरी नहीं, बल्कि एक अंदरूनी चूक का सबसे खौफनाक नमूना है। यह मामला हैकिंग के लिहाज से इसलिए भी चौंकाने वाला है, क्योंकि क्रिप्टो करेंसी को हैंडल करने वाली सस्थाएं अभेद्य किले जैसी सबसे मजबूत सिक्योरिटी का इस्तेमाल करती हैं। इस घटना के बाद क्रिप्टो में निवेश करने वालों के मन में सवाल उठने लगे हैं कि अब इसमें निवेश करना कितना सुरक्षित है? आइए समझते हैं इस हमले को कैसे अंजाम दिया गया।
बाइनेंस क्या है और इसका काम क्या है?
बाइनेंस दुनिया का सबसे बड़ा क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज है। इसे आसान भाषा में समझें तो यह डिजिटल करेंसी का ऑनलाइन बाजार है। जैसे शेयर बाजार में लोग शेयर खरीदते और बेचते हैं, उसी तरह बाइनेंस पर बिटकॉइन, इथेरियम और दूसरी क्रिप्टोकरेंसी की खरीद-बिक्री होती है। यूजर्स यहां अपनी क्रिप्टो संपत्ति जमा कर सकते हैं, एक करेंसी को दूसरी में बदल सकते हैं और ट्रेडिंग कर सकते हैं।
बाइनेंस की शुरुआत 2017 में हुई थी। इसके दुनिया भर में 30 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर्स हैं। इतनी बड़ी संख्या में यूजर्स के लेनदेन को संभालने के लिए एक्सचेंज को डिजिटल वॉलेट और दूसरे तकनीकी सिस्टम का इस्तेमाल करना पड़ता है। इन्हीं सिस्टम में से एक है हॉट वॉलेट। यह इंटरनेट से जुड़ा डिजिटल वॉलेट होता है, जिससे एक्सचेंज यूजर्स के जमा और निकासी के अनुरोध पूरे करता है। यही वॉलेट इस साइबर हमले का अहम हिस्सा बना।
हैकर्स ने बाइनेंस पर हमला कैसे किया?
- बाइनेंस पर यह हमला 29 अक्तूबर को हुआ। हैकर्स जानते थे कि बाइनेंस के मेन सर्वर या ब्लॉकचेन की मुख्य दीवार को तोड़ना असंभव है। इसलिए उन्होंने अंदरूनी रास्ते का इस्तेमाल किया। हैकर्स ने बाइनेंस के सिस्टम पर सीधा हमला करने के बजाय कंपनी के एक डेवऑप्स इंजीनियर (DevOps Engineer) के लैपटॉप को हैक किया। इस हैक किए गए लैपटॉप के जरिए हैकर्स को बाइनेंस के सर्विस कंटेनर, यानी सिस्टम का वो हिस्सा जहां से ट्रांजैक्शन कमांड दिए जाते हैं, का एक्सेस मिल गया।
- ब्लॉकचेन डेटा ट्रैकर्स ZachXBT की जांच से पता चला कि हैकर्स ने बाइनेंस-14 नाम के हॉट वॉलेट को अपना शिकार बनाया। उन्होंने EIP-7702 नाम के एक स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट प्रोटोकॉल का इस्तेमाल किया। इसके जरिए उन्होंने बाइनेंस के वॉलेट को ही एक स्वीपर में बदल दिया, जो अपने आप सारा फंड दूसरे खाते में भेजने लगा।
- सिस्टम को भनक लगने से पहले, महज 3 मिनट 24 सेकंड के भीतर हैकर्स ने 1,67,464 से ज्यादा एथेरियम (ETH) और 1.6 बिलियन USDT स्टेबलकॉइन सहित 63 अन्य टोकन अनधिकृत रूप से निकाल लिए।
- इस बीच, टेथर और सर्कल जैसी कंपनियों ने भी बाइनेंस हैक से जुड़े 3 बिलियन डॉलर से अधिक की क्रिप्टो करेंसी फ्रीज कर दी हैं ताकि हैकर्स इसे कैश न करा सकें।
सुरक्षा में कहां हुई इतनी बड़ी चूक?
- सिंगल पॉइंट ऑफ फेलियर:सबसे बड़ी चूक यह रही कि एक साधारण से लैपटॉप के हैक होने से पूरे सिस्टम का एक्सेस मिल गया। मिलिट्री-ग्रेड सुरक्षा का दावा करने वाली कंपनी में एक डिवाइस का हैक होना इतने बड़े पैमाने पर तबाही कैसे मचा सकता है, यह टेक जगत के लिए हैरानी की बात है।
- जीरो-ट्रस्ट का पालन न करना:टेक कंपनियां ‘जीरो-ट्रस्ट’ नीति पर काम करती हैं। यानी किसी पर भी, यहां तक कि अपने कर्मचारियों पर भी अंधा भरोसा न करना। लेकिन डेवऑप्स इंजीनियर के पास इतने ज्यादा अधिकार थे कि उसके लैपटॉप से आए कमांड को बिना किसी मल्टीपल अप्रूवल के सिस्टम ने सही मान लिया।
- एआई अलर्ट सिस्टम की सुस्ती:जब 6.3 बिलियन डॉलर जैसी विशाल रकम अचानक सिस्टम से बाहर जा रही थी, तो बाइनेंस के ऑटोमेटेड रिस्क मॉनिटरिंग (AI) सिस्टम को इसे एक ही सेकंड में रोक देना चाहिए था। इस सिस्टम का इतनी देर से एक्टिव होना एक बहुत बड़ा सिक्योरिटी फेलियर माना जा रहा है।
अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ?
- इस महा-हैक के बाद से क्रिप्टो मार्केट में हड़कंप मचा हुआ है। बाइनेंस और जांच एजेंसियों ने अब तक कई बड़े कदम उठाए हैं। हमले का पता चलते ही बाइनेंस ने एहतियात के तौर पर अपने प्लेटफॉर्म पर सभी तरह के डिपॉजिट और विड्रॉल पर रोक लगा दी है।
- बाइनेंस ने तुरंत लॉ एन्फोर्समेंट और ‘टेथर’ व ‘सर्कल’ जैसे ब्लॉकचेन पार्टनर्स के साथ मिलकर काम शुरू किया। इसके नतीजे में लगभग 3 बिलियन डॉलर की एसेट्स को समय रहते फ्रीज कर लिया गया है।
- लगभग 440 मिलियन डॉलर का एथेरियम अब भी हैकर के पास हैं, क्योंकि एथेरियम के डिसेंट्रलाइज्ड नेचर के कारण उसे आसानी से फ्रीज नहीं किया जा सकता। इस घटना से बिटकॉइन 79,000 डॉलर के नीचे चला गया और करोड़ों डॉलर का लिक्विडेशन हो गया।
यूजर्स के पैसों का क्या होगा?
एक आम निवेशक का सबसे पहला डर यही है कि कहीं उसकी जमा-पूंजी डूब तो नहीं जाएगी? बाइनेंस और उसके पूर्व सीईओ चांगपेंग झाओ ने ग्राहकों को राहत देते हुए साफ कहा है कि यूजर्स का पैसा पूरी तरह से सुरक्षित है। कंपनी ने ग्राहकों के हर एक पैसे के नुकसान की 100% भरपाई का वादा किया है। इसके लिए बाइनेंस के सिक्योर एसेट फंड का इस्तेमाल किया जाएगा। यह एक इमरजेंसी फंड है, जिसे यूजर्स की संपत्ति की सुरक्षा के लिए बनाया गया था। सबसे अच्छी बात यह है कि हैकर्स के हाथ किसी भी ग्राहक के निजी वॉलेट की प्राइवेट-की नहीं लगी है।
बाइनेंस की टीम दिन-रात जांच एजेंसियों के साथ मिलकर हैकर्स की पहचान करने और बाकी फंड रिकवर करने में जुटी है। कंपनी ने वादा किया है कि जांच पूरी होने और हालात सामान्य होने के बाद वह एक विस्तृत टेक्निकल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और नया प्रूफ ऑफ रिजर्व पब्लिश करेगी, जिससे इस मामले की पूरी तकनीकी सच्चाई दुनिया के सामने आएगी।
क्रिप्टो बाजार पर क्या पड़ा असर?
इस हैक के कारण पूरा क्रिप्टो बाजार क्रैश हो गया है। खबर आते ही एक घंटे के भीतर 628 मिलियन डॉलर का लिक्विडेशन हुआ और बिटकॉइन 3 फीसदी से ज्यादा की गिरावट के साथ 79,000 डॉलर के नीचे चला गया। एथेरियम और बाइनेंस के अपने टोकन में भी गिरावट दर्ज की गई है।
फिलहाल, बाइनेंस की टीम दिन-रात जांच एजेंसियों के साथ मिलकर हैकर्स की पहचान करने और बाकी फंड रिकवर करने में जुटी है। कंपनी ने वादा किया है कि जांच पूरी होने और हालात सामान्य होने के बाद वह एक विस्तृत टेक्निकल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और नया प्रूफ ऑफ रिजर्व पब्लिश करेगी, जिससे इस मामले की पूरी तकनीकी सच्चाई दुनिया के सामने आएगी।
फिलहाल हैकिंग के इस मामले करीब 6.3 अरब डॉलर के एसेट्स के ट्रांसफर होने अनुमान लगाया गया है। यह मामला सिर्फ एक एक्सचेंज की सुरक्षा का नहीं, बल्कि पूरी क्रिप्टो इंडस्ट्री में डिजिटल संपत्ति की सुरक्षा और भरोसे का बड़ा सवाल बन गया है।
बता दें कि यह महीना साइबर सुरक्षा के लिहाज से बेहद खराब रहा है। इससे पहले पॉलीमार्केट, कॉइनबेस, ई-मुद्रा और यहां तक कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) जैसी संस्थाएं भी डेटा ब्रीच और सिक्योरिटी हैक का शिकार हो चुकी हैं।