Sport : टेस्ट क्रिकेट में कौन-कौन सी फील्डिंग पोजीशन होती है इस्तेमाल, जानिए किस फील्डर को क्या कहते हैं? #INA

Explainer: क्रिकेट से सबसे पुराने फॉर्मेट में टेस्ट शामिल है. टेस्ट मैच की अपने शुरुआती दौर में कोई लिमिट नहीं थी. रेड बॉल क्रिकेट तब तक खेला जाता था, जब तक मैच का परिणाम नहीं निकल आए. तब टेस्ट मैच 4 दिन के या फिर 5 दिन के भी हुआ करते थे. टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में एक समय ऐसा भी था, जब टेस्ट मैच 6 दिनों के भी खेले जाते थे. 

टेस्ट मैच जब 6 दिनों का होता था तो काफी रोमांचक होता था. उस समय टेस्ट क्रिकेट में बीच में एक दिन रेस्ट डे होता है. टेस्ट मैच में उस समय दोनों टीमों के खिलाड़ियों को आराम का मौका मिलता था, जिसके बाद वो दोबारा से मैदान पर आकर अपना आक्रमक खेल दिखा पाते ते.

टेस्ट क्रिकेट समय के साथ बदलता गया. अब टेस्ट मैच सिर्फ 5 दिन के खेले जाते हैं. इसमें दोनों टीमों को 2-2 पारियों खेलने के लिए मिलती है. वहीं अब होने वाले टेस्ट मैचों के नतीजे कभी कभी 2 से तीन दिन में भी निकल आते हैं. क्रिकेट का जब से अधुनिकरण हुआ, तब से टेस्ट क्रिकेट का मूल स्वरूप बदलने लगा है. 

I can not play Test Cricket says Andre Russell

टेस्ट क्रिकेट को पहले वनडे क्रिकेट ने बदला, जब रंगीन कपड़ों में खिलाड़ी मैदान पर खेलने लगे और मैच 50-50 ओवर के होने लगे तो टेस्ट क्रिकेट बदलने लगा और वनडे क्रिकेट की तेजी टेस्ट क्रिकेट में भी देखने को मिली और टी20 क्रिकेट में पूरी तरह से टेस्ट क्रिकेट को बदल डाला है. इस समय दुनिया भर के तमाम क्रिकेटर टी20 क्रिकेट खेलते हैं. 

ये क्रिकेटर टी20 क्रिकेट के धूमधड़ाके में इतने रम चुके हैं कि टेस्ट क्रिकेट में भी उसकी छाप देखने को मिलती है. अब हर क्रिकेटर टेस्ट क्रिकेट में तूफानी बल्लेबाजी करता है. वो तेजी से रन बनाने की सोचता है और बॉलर की जमकर पिटाई करता है. इंग्लैंड क्रिकेट टीम ने बैजबॉल क्रिकेट के जरिए टेस्ट क्रिकेट को टी20 की तरह बना डाला है.  

टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत से लेकर अब तक इस फॉर्मेट में तरह-तरह की फील्डिंग पोजीशन अपनाई गईं. ये एकमात्र ऐसा फॉर्मेट है, जिसमें अजीबो-गरीब फील्डिंग भी लगाई जाती है. एक बल्लेबाजों को सभी फील्डर घेर लेते हैं. तो टेस्ट क्रिकेट में कौन-कौन सी फील्डिंग पोजीशन का इस्तेमाल होता है. कौन से फील्डर को क्या कहते हैं, आइए आज इसके बारे में जानते हैं.

टेस्ट क्रिकेट में इस्तेमाल होने वाली पोजीशन 

आज के समय में टेस्ट क्रिकेट में फील्डिंग पोजीशन अलग-अलग तरह से इस्तेमाल होती है. टेस्ट क्रिकेट में फील्डिंग पोजीशन अब बल्लेबाज, गेंदबाज और मैच की स्थिति को देखते हुए तय की जाती है. तो आइए हम आपको टेस्ट क्रिकेट में इस्तेमाल होने वाली फील्डिंग पोजीशन के बारे में बताते हैं. 

विकेट के पास की फील्डिंग पोजिशन

स्लिप – टेस्ट क्रिकेट में पहली, दूसरी, तीसरी स्पिल भी लगाई जाती है. विकेटकीपर के बगल में खड़े होने वाले फील्डर को स्पिल का फील्डर कहते हैं. 
गली – टेस्ट क्रिकेट में अक्सर गली में फील्डर लगाया जाता है. स्लिप और पॉइंट के बीच में खेड़े होने वाले फील्डर को गली फील्डर कहते हैं.
लेग स्लिप – लेग स्पिल का टेस्ट क्रिकेट में सबसे इस्तेमाल किया जाता है. विकेटकीपर के लेग साइड में जो फील्डर खड़ा होता है. उसे लेग स्लिप करते हैं.
शॉर्ट लेग – टेस्ट क्रिकेट में शॉर्ट लेग का भी उपयोग किया जाता है. बल्लेबाज के बहुत करीब लेग साइड में खड़ा होने वाला फील्डर शॉर्ट लेग कहलता है.
सिली पॉइंट – सिली पॉइंट का भी टेस्ट क्रिकेट में ज्यादातर फील्डिंग पर लगाया जाता है. ये बल्लेबाज के बहुत करीब ऑफ साइड में खड़ा होता है.
फॉरवर्ड शॉर्ट लेग – टेस्ट क्रिकेट में फॉरवर्ड शॉर्ट लेग का फील्डर भी लगाया जाता है. ये शॉर्ट लेग से थोड़ा आगे की ओर खड़ा होता है. 

Explainer
Explainer Photograph: (AI)

ऑफ साइड की फील्डिंग पोजीशन

पॉइंट – टेस्ट क्रिके टमें पॉइंट की फील्डिंग पोजीशन का यूज भी किया जाता है. बल्लेबाज के दाईं ओर (दाएं हाथ के बल्लेबाज के लिए) खड़े होने वाला फील्डर पॉइंट का फील्डर कहलाता है.
बैकवर्ड पॉइंट – बैकवर्ड पॉइंट की फील्डिंग पोजीशन भी अकसर टेस्ट क्रिकेट में देखने को मिलती है. ये फील्डर पॉइंट से थोड़ा पीछे खड़ा रहता है. 
कवर – टेस्ट क्रिकेट में कवर्स का फील्डर भी अहम होता है. ये फील्डर पॉइंट और मिड-ऑफ के बीच में खड़ा रहकर क्षेत्ररक्षण करता है. 
एक्स्ट्रा कवर – एक्स्ट्रा कवर के फील्डर का भी इस्तेमाल टेस्ट क्रिकेट में किया जाता है. ये फील्डर कवर और मिड-ऑफ के बीच में रहकर फील्डिंग करता है. 
मिड-ऑफ – टेस्ट क्रिकेट में मिड-ऑफ का फील्डर अपको अक्सर लगा हुआ मिलता है. गेंदबाज के सामने ऑफ साइड में खड़े रहने वाले फील्डर को मिडऑफ कहते हैं. 
डीप पॉइंट – टेस्ट क्रिकेट में अक्सर आपने डीप पॉइंट का फील्डर भी देखा होगा. ये बाउंड्री के पास पॉइंट क्षेत्र में रहता है. 
डीप कवर – डीव कवर भी टेस्ट क्रिकेट में होता है. ये खिलाड़ी बाउंड्री के पास कवर क्षेत्र में फील्डिंग करता है. 

लेग साइड की फील्डिंग पोजीशन

मिड-ऑन – टेस्ट क्रिकेट में मिडऑन का फील्डर भी आपको दिखाई देता होगा. ये गेंदबाज के सामने लेग साइड में क्षेत्ररक्षण करता है.
मिड-विकेट – मिड विकेट का फील्डर भी अक्सर आपको टेस्ट क्रिकेट में दिखता है. ये फील्डर स्क्वायर लेग और मिड-ऑन के बीच में खड़ा होता है. 
स्क्वायर लेग – टेस्ट क्रिकेट में स्क्वायर लेग का फील्डर अहम भूमिका निभाता है. ये बल्लेबाज के लेग साइड में 90° कोण पर खड़ा होकर फील्डिंग करता है.
बैकवर्ड स्क्वायर लेग – टेस्ट में बैकवर्ड स्क्वायर लेग का फील्डर भी आपको नजर आता होगा. ये स्क्वायर लेग से पीछे खड़ा होता है.
फाइन लेग – फाइनल लेग का फील्डर विकेटकीपर के पीछे लेग साइड में खड़ा होकर फील्डिंग करता है.
लेग गली – टेस्ट क्रिकेट में आपको अक्सर लेग गली भी दिखाई देती होगी. ये फील्डर लेग स्लिप और बैकवर्ड स्क्वायर लेग के बीच फील्डिंग करता है.
डीप मिड-विकेट – टेस्ट क्रिकेट में डीप मिड विकेट का फील्डर आपने अक्सर देखा होगा. ये बाउंड्री के पास मिड-विकेट क्षेत्र में होता है. 
डीप स्क्वायर लेग – डीप स्क्वार लेग का फील्डर आपको टेस्ट क्रिकेट में दिखाई देता है. बाउंड्री के पास स्क्वायर लेग क्षेत्र में खड़ा होकर ये फील्डिंग करता है.
लॉन्ग लेग – टेस्ट क्रिकेट में लॉन्ग लेग का फील्डर भी होता है. ये बाउंड्री पर फाइन लेग की दिशा में होता है. 

TEST Cricket
TEST Cricket Photograph: (AFP)

इसके अलावा मैदान के सामने यानी बल्लेबाज के सामने स्ट्रेट हिट फील्डर भी लगाया जाता है. जो बल्लेबाज के तीर के सामने सीधे शॉट को लगाने के लिए बिल्कुल विकेट के सामने खड़ा रहता है. टेस्ट क्रिकेट में फील्डिंग कभी भी कहीं भी लगाई जा सकती है. इस फॉर्मेट में फील्डर को 30 गज के दायरे या व्हाइट बॉल क्रिकेट के फॉर्मेट की तरह नियमों का पालन नहीं करना पड़ता है. 

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