Sport : EXPLAINER: क्या है DLS मैथड, जिसने दूसरे वनडे में भारत को दिलाई जीत? कैसे करता है काम, कब हुआ पहली बार इस्तेमाल, जानें सब-कुछ #INA

EXPLAINER: न्यूजीलैंड के साथ खेले गए दूसरे वनडे मैच को भारतीय क्रिकेट टीम ने DLS मैथड की मदद से 4 रन से जीत लिया और इसी के साथ 5 मैचों की इस सीरीज में 2-0 की बढ़त हासिल कर ली है. टीम इंडिया की इस जीत के बाद से ही क्रिकेट के गलियारों में एक बार फिर डकवर्थ लुईस स्टर्न मैथड के बारे में चर्चा शुरू हो गई है. तो आइए इस आर्टिकल में हम आपको इस मैथड के बारे में विस्तार से बताते हैं, जिसकी मदद से बारिश से प्रभावित मैचों का नतीजा निकाला जाता है…

क्या है डकवर्थ लुईस स्टर्न (DLS) मैथड?

डकवर्थ लुईस मैथड स्टर्न क्रिकेट में बारिश या किसी अन्य रुकावट के कारण मैच के ओवर कम होने पर संशोधित लक्ष्य निर्धारित करने का एक तरीका है. इसका इस्तेमाल लिमिटेड ओवर क्रिकेट यानी वनडे और टी20 मुकाबलों में किया जाता है. इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बारिश से प्रभावित मैच में दोनों टीमों के बीच मुकाबला निष्पक्ष रहे.

आसान भाषा में समझें तो क्रिकेट में किसी टीम के पास रन बनाने के लिए दो महत्वपूर्ण संसाधन होते हैं. पहला, उसके पास बचे हुए ओवर और दूसरा, उसके पास बचे हुए विकेट. इन दोनों को मिलाकर संसाधन कहा जाता है. जब कोई टीम बल्लेबाजी करती है, तो उसके पास उपलब्ध ओवर और विकेट के आधार पर रन बनाने की क्षमता तय होती है.

डकवर्थ लुईस मैथड की शुरुआत कब और किसने की थी?

डकवर्थ लुईस मैथड का आविष्कार इंग्लैंड के दो स्टैटिशियंस फ्रैंक डकवर्थ और टोनी लुईस ने किया था. इसी वजह से शुरुआत में इस नियम का नाम डकवर्थ-लुईस मैथड रखा गया था. इस नियम को बनाने की जरूरत 1992 के वनडे वर्ल्ड कप में इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले के बाद महसूस हुई थी.

मगर, साल 1996-97 के दौरान इस मैथड को औपचारिक रूप से अपनाया गया और 1 जनवरी 1997 को जिम्बाब्वे और इंग्लैंड के बीच हरारे में खेले गए वनडे मुकाबले में पहली बार इसका इस्तेमाल हुआ. इस मैच में जिम्बाब्वे ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 200 रन बनाए थे. बारिश के कारण इंग्लैंड को 42 ओवर खेलने का मौका मिला और उसके सामने 186 रन का संशोधित लक्ष्य रखा गया। इंग्लैंड की टीम 179 रन ही बना सकी और उसे 6 रन से हार का सामना करना पड़ा. बाद में साल 1999 के वर्ल्ड कप में आईसीसी ने इस मैथड को आधिकारिक तौर पर अपनाया.

डकवर्थ लुईस मैथड का नाम DLS कब पड़ा?

शुरुआत में इसे डकवर्थ-लुईस मैथड कहा जाता था, लेकिन समय के साथ क्रिकेट में बल्लेबाजी का अंदाज बदलने लगा. खासतौर पर वनडे और टी20 क्रिकेट में बल्लेबाज पहले की तुलना में तेजी से रन बनाने लगे. ऐसे में पुराने गणितीय मॉडल को आधुनिक क्रिकेट की परिस्थितियों के मुताबिक अपडेट करने की जरूरत महसूस हुई.

ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकीविद स्टीवन स्टर्न ने इस मैथड में बदलाव और सुधार करने में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने बल्लेबाजी के बदलते ट्रेंड और तेजी से रन बनाने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए इसके मॉडल को बेहतर बनाने में योगदान दिया. फ्रैंक डकवर्थ और टोनी लुईस के रिटायर होने के बाद स्टीवन स्टर्न ने इस सिस्टम की जिम्मेदारी संभाली. नवंबर 2014 में आईसीसी ने इसका नाम बदलकर डकवर्थ-लुईस-स्टर्न (DLS) मैथड कर दिया.

DLS मैथड कैसे काम करता है?

DLS मैथड को समझने के लिए सबसे पहले इसके दो बातों के बारे में समझना जरूरी है, जो हैं बचे हुए ओवर और बचे हुए विकेट. किसी भी टीम के पास जितने ज्यादा ओवर और विकेट उपलब्ध होंगे, उसके पास रन बनाने की उतनी ही अधिक क्षमता होगी.

उदाहरण के लिए, किसी टीम के पास 20 ओवर बाकी हैं और उसके सभी 10 विकेट सुरक्षित हैं, तो वह तेजी से रन बना सकती है. वहीं अगर उसी टीम के पास 20 ओवर बाकी हैं, लेकिन उसके 8 विकेट गिर चुके हैं, तो उसके लिए तेजी से रन बनाना मुश्किल होगा. DLS मैथड इन दोनों परिस्थितियों का आकलन करता है. इसके लिए एक खास रिसोर्स टेबल और गणितीय मॉडल का इस्तेमाल किया जाता है। इस टेबल में अलग-अलग ओवर और बचे हुए विकेट के हिसाब से संसाधनों का प्रतिशत निर्धारित होता है.

जब बारिश के कारण मैच रुकता है, तो सिस्टम यह देखता है कि रुकावट से पहले और मैच दोबारा शुरू होने के बाद दोनों टीमों के पास कितने संसाधन बचे हैं. इसके आधार पर संशोधित लक्ष्य तय किया जाता है. इसमें एक अहम बात यह भी है कि अगर दूसरी टीम को पहली टीम की तुलना में कम संसाधन मिलते हैं, तो उसका लक्ष्य कम किया जाता है. वहीं अगर दूसरी टीम को पहली टीम से ज्यादा संसाधन मिलते हैं, तो उसका लक्ष्य बढ़ाया भी जा सकता है. यानी DLS मैथड में सिर्फ ओवरों की संख्या नहीं, बल्कि विकेटों की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है.

DLS मैथड में पार स्कोर (Par Score) क्या होता है?

क्रिकेट में DLS मैथड के दौरान आपने पार स्कोर (Par Score) शब्द भी सुना होगा. इसका मतलब होता है कि मैच के किसी विशेष समय पर दूसरी टीम को जीत, हार या बराबरी की स्थिति में रहने के लिए कितने रन बनाने चाहिए थे.

मान लीजिए दूसरी टीम बारिश आने से पहले 20 ओवर में 100 रन बना चुकी है और उसके 3 विकेट गिर चुके हैं. बारिश के कारण मैच वहीं समाप्त हो जाता है. ऐसे में DLS मैथड के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि उस समय दूसरी टीम का पार स्कोर कितना था.

  •  अगर दूसरी टीम का स्कोर पार स्कोर से ज्यादा है, तो वह जीत जाएगी.
  • अगर दूसरी टीम का स्कोर पार स्कोर के बराबर है, तो मुकाबला टाई माना जाएगा.
  • अगर दूसरी टीम का स्कोर पार स्कोर से कम है, तो उसे हार का सामना करना पड़ेगा.

DLS मैथड में न्यूनतम ओवर का नियम क्या है?

DLS मैथड के तहत हर बारिश से प्रभावित मुकाबले का नतीजा घोषित करना संभव नहीं होता. किसी मैच को परिणाम वाला मुकाबला बनाने के लिए दूसरी पारी में निर्धारित न्यूनतम ओवर पूरे होना जरूरी होता है.

वनडे इंटरनेशनल में सामान्य तौर पर दूसरी टीम को कम से कम 20 ओवर खेलने का मौका मिलना चाहिए. वहीं टी20 इंटरनेशनल में यह सीमा 5 ओवर है. अगर बारिश इतनी देर तक होती है कि दूसरी टीम न्यूनतम जरूरी ओवर भी नहीं खेल पाती और मैच का परिणाम निकालने की कोई दूसरी निर्धारित व्यवस्था लागू नहीं होती, तो मुकाबला रद्द घोषित किया जा सकता है. वहीं अगर मैच में न्यूनतम ओवर पूरे हो चुके हैं, तो DLS के पार स्कोर के आधार पर विजेता तय किया जा सकता है.

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