Sport : Explainer: 3 साल में बना वो 'अमर' रिकॉर्ड जिसने टेस्ट क्रिकेट में लिखा 'ब्लैक चैप्टर', जानें क्यों अब कोई टीम नहीं कर पाएगी ऐसा? #INA

Test Records: टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसे बेहतरीन रिकॉर्ड्स हैं जिन पर खिलाड़ियों और टीमों को गर्व होता है और उन रिकॉर्ड्स को तोड़ना भी किसी टीम के लिए बड़ी बात होती है, लेकिन वहीं कुछ ऐसे रिकॉर्ड्स भी बने हैं जिन्हें टेस्ट क्रिकेट जगत का एक काला अध्याय माना जाता है. बांग्लादेश का लगातार 21 टेस्ट मैच हारने का वह शर्मनाक रिकॉर्ड एक ऐसा रिकॉर्ड है जिसे कोई भी टीम कभी अपने नाम नहीं करना चाहेगी. बांग्लादेश ने यह अनचाहा रिकॉर्ड साल 2001 से 2004 के बीच बनाया था और आज के आधुनिक क्रिकेट के दौर में इस रिकॉर्ड का टूटना एक पहेली जैसा लगता है. सवाल उठता है कि क्या बांग्लादेश का बनाया हुआ लगातार सबसे ज्यादा टेस्ट हार का यह रिकॉर्ड उतना ही सुरक्षित है जितना दिखता है? क्या भविष्य में कोई भी टीम इस रिकॉर्ड की बराबरी कर पाएगी या इसे तोड़ पाएगी, क्योंकि आज का टेस्ट क्रिकेट पूरी तरह से बदल गया है जहां आज टीमें एक-दूसरे को कड़ी टक्कर देती हैं और टी20 और वनडे के आने से बल्लेबाज और गेंदबाज अब आक्रामक खेल खेलते हैं, तो आइए इस आर्टिकल में जानते हैं कि बांग्लादेश का यह रिकॉर्ड क्यों कभी भी नहीं टूट पाएगा.

टेस्ट क्रिकेट इतिहास का सबसे काला दौर

बांग्लादेश क्रिकेट टीम को साल 2000 में टेस्ट दर्जा तो मिल गया था, लेकिन इसके बाद से बांग्लादेशी टीम को इंटरनेशनल क्रिकेट में काफी संघर्ष करना पड़ा था. नवंबर 2001 में बांग्लादेश का जिम्बाब्वे के खिलाफ हार से शुरू हुआ यह सिलसिला फरवरी 2004 में जाकर रुका, और इस दौरान बांग्लादेश ने लगातार 21 टेस्ट मैच गंवाए. इनमें से ज्यादातर मैचों में टीम को एक पारी या भारी अंतर से शिकस्त झेलनी पड़ी थी. इस सिलसिले का तकनीकी विश्लेषण करने से ज्यादा महत्वपूर्ण यह समझना है कि उस समय बांग्लादेश एक नई-नवेली टीम थी, जिसके पास न तो लंबा फर्स्ट-क्लास क्रिकेट का अनुभव था और न ही अंतरराष्ट्रीय स्तर का बुनियादी ढांचा था. लेकिन आज का क्रिकेट खेलने का तरीका, उसकी परिस्थितियां और पूरा माहौल पूरी तरह बदल चुका है. 

टॉप टीमों की मजबूत संरचना और जवाबदेही

आज के समय में भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी बड़ी टीमों के पास वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं, बेहतरीन कोच, डेटा एनालिटिक्स और बैकअप खिलाड़ियों की एक बड़ी फौज है. अगर कोई मजबूत टीम लगातार 3 या 4 टेस्ट मैच भी हार जाती है, तो क्रिकेट बोर्ड, मीडिया और फैंस का दबाव इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि टीम में तुरंत बड़े बदलाव कर दिए जाते हैं. कप्तान बदल दिए जाते हैं, कोचों की छुट्टी हो जाती है और घरेलू क्रिकेट से नए प्रतिभावान खिलाड़ियों को टीम में मौका दिया जाता है. इतने मजबूत और प्रोफेशनल सिस्टम के कारण किसी भी बड़ी या मीडियम स्तर की टीम के लिए लगातार 21-22 टेस्ट हारना नामुमकिन जैसा है. कोई भी टीम इतनी लंबी हार का सिलसिला बर्दाश्त ही नहीं कर सकती. 

कमजोर टीमों के लिए मैचों की कमी और समय का संकट

टेस्ट क्रिकेट के इस रिकॉर्ड को टूटने से रोकने वाला सबसे बड़ा कारण ‘समय’ है. बांग्लादेश को 21 टेस्ट मैच खेलने में लगभग 3 से 4 साल का समय लगा था. लेकिन आज के दौर में ICC रैंकिंग में नीचे रहने वाली टीमों (जैसे आयरलैंड, अफगानिस्तान या जिम्बाब्वे) को सालभर में बहुत मुश्किल से 2 से 4 टेस्ट मैच ही खेलने को मिलते हैं. ऐसे में आईसीसी के मौजूदा फ्यूचर टूर्स प्रोग्राम (FTP) के नियमों के अनुसार, यदि कोई कमजोर टीम लगातार 21 टेस्ट मैच हारना भी चाहे, तो उसे इतने मैच खेलने में ही 7 से 10 साल का लंबा समय लग जाएगा.

इतने लंबे समय तक लगातार हारने की वजह से उस देश में टेस्ट क्रिकेट का वजूद ही हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा और स्पॉन्सर्स भी टीम का साथ छोड़ देंगे. इसके साथ ही, लगातार हार से खिलाड़ियों का मनोबल पूरी तरह टूट जाता है और प्रशंसकों का अपनी टीम से भरोसा उठ जाता है. किसी भी देश का क्रिकेट बोर्ड वित्तीय तबाही और बोर्ड के अंदरूनी विवादों के कारण इतने लंबे समय तक बिना किसी सुधार के काम नहीं कर सकता. जिससे यह रिकॉर्ड टूटना व्यावहारिक रूप से नामुमकिन हो जाता है.

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छोटी टीमों का आपस में मुकाबले और जीत का मौका

आज ICC की नीति कमजोर टीमों को आगे बढ़ाने की है, जिसके तहत वे टीमें ज्यादातर आपस में ही खेलती हैं. उदाहरण के लिए, अफगानिस्तान, आयरलैंड और जिम्बाब्वे जैसी टीमें अक्सर एक-दूसरे के खिलाफ ही सीरीज खेलती हैं. जब दो एक जैसे स्तर की टीमें आपस में मुकाबला करेंगी, तो किसी न किसी मैच का नतीजा उनके पक्ष में जरूर जाएगा या फिर वह मैच ड्रॉ हो जाएगा. लगातार 21 मैच हारने के लिए यह जरूरी है कि टीम हर हाल में और हर विरोधी के सामने हारे, जो कि बराबर की टीमों के खिलाफ खेलते हुए मुमकिन नहीं लगता. इसके अलावा, पिचों की स्थिति, मौसम का मिजाज और किस्मत भी इतने लंबे समय में कम से कम एक मैच को ड्रॉ कराने में मदद कर ही देती है, जिससे लगातार हारने का यह सिलसिला बीच में ही टूट जाता है.

बांग्लादेश का यह अटूट और ऐतिहासिक रिकॉर्ड टूटना नामुमकिन

बांग्लादेश का लगातार 21 टेस्ट मैच हारने का यह रिकॉर्ड आधुनिक क्रिकेट में पूरी तरह सुरक्षित है. इस रिकॉर्ड की बराबरी करना या इसे तोड़ना किसी भी टीम के लिए एक बहुत बड़ी नकारात्मक उपलब्धि होगी, क्योंकि इस रिकॉर्ड के टूटने के लिए आज के दौर में किसी टीम को 8 से 10 साल तक लगातार खराब प्रदर्शन करना और उतने मैचों का मिलना जरूरी है. बदलते क्रिकेट प्रशासन, टी20 लीग्स के बढ़ते प्रभाव और टेस्ट क्रिकेट के सिमटते स्वरूप को देखते हुए यह साफ है कि भविष्य में कोई भी टीम इस निराशाजनक आंकड़े के करीब भी नहीं पहुंच पाएगी. यानी बांग्लादेश क्रिकेट टीम का यह अनचाहा इतिहास हमेशा के लिए टेस्ट क्रिकेट की किताबों में सुनहरे अक्षरों के बजाय एक काले पन्ने के रूप में दर्ज रहेगा.

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Explainer: 3 साल में बना वो 'अमर' रिकॉर्ड जिसने टेस्ट क्रिकेट में लिखा 'ब्लैक चैप्टर', जानें क्यों अब कोई टीम नहीं कर पाएगी ऐसा?





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