नेपाल-आंदोलन के एक साल बाद भी मुकदमे झेल रहे Gen-Z:पुरानी और मौजूदा सरकार में खास अंतर नहीं; संविधान-संशोधन जैसे मुद्दे अब भी अधूरे- INA NEWS

नेपाल में भ्रष्टाचार खत्म करने और सुशासन की मांग को लेकर 8-9 सितंबर 2025 को हुए Gen-Z आंदोलन को एक साल पूरा हो गया है। आंदोलन के बाद सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी थी। इसके बाद बालेन के नेतृत्व वाली सरकार को भी 6 महीने हो चुके हैं। इसके बावजूद आंदोलन के दौरान उठाए गए कई मुद्दे अब तक अधूरे हैं। Gen-Z युवाओं के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे भी वापस नहीं लिए गए हैं। संविधान और शासन व्यवस्था में बदलाव, निर्वाचन प्रणाली में सुधार, Gen-Z युवा परिषद का गठन, आंदोलन के दौरान दमन करने वालों पर कार्रवाई, शहीद परिवारों को राहत, रोजगार और भ्रष्टाचार खत्म करने जैसे मुद्दों पर सरकार की गंभीरता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शरीर में अब भी छर्रे, इलाज का खर्च खुद उठा रहे आंदोलन के दौरान घायल हुए लोगों को अब तक पर्याप्त इलाज नहीं मिल सका है। Gen-Z आंदोलन में सक्रिय अर्जुन चुंदाली के मुताबिक, कुछ घायल अपने खर्च पर भारत जाकर इलाज करा रहे हैं। कई लोगों के शरीर में अब भी गोलियों के छर्रे हैं। Gen-Z आंदोलन में दो दिनों के दौरान 77 लोगों की मौत हुई थी और 2,429 लोग घायल हुए थे। आंदोलन से करीब 84 अरब 45 करोड़ रुपए के बराबर आर्थिक नुकसान का अनुमान है। पहले दिन संसद भवन के सामने 20 से ज्यादा छात्रों की मौत हुई थी। गृहमंत्री बोले- मांगें पूरी करने में जुटे हैं आंदोलन के अगुआ रहे सुदन गुरुंग अब नेपाल के गृहमंत्री हैं। उन्होंने कहा, “हमने जो कसम खाई है, उसे पूरा करना है। कई काम बाकी हैं, लेकिन हम जुटे हुए हैं।” Gen-Z आंदोलन शहीद परिवार के अध्यक्ष नारायण श्रेष्ठ ने कहा कि आंदोलन के दौरान युवाओं पर अत्याचार करने वाले दोषियों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शहीद और घायल परिवारों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की पूरी जिम्मेदारी राज्य को लेनी चाहिए। भास्कर एक्सपर्ट: नए लोगों को जनमत दिलाने तक सीमित रहा आंदोलन राजनीतिक विश्लेषक प्रो. डॉ. बासुदेव खनाल के मुताबिक, Gen-Z आंदोलन पुराने राजनीतिक दलों के प्रति आक्रोश पैदा करने और नए लोगों के पक्ष में जनमत बनाने तक सीमित रह गया। उनका कहना है कि Gen-Z युवा कानून के शासन के लिए लड़े थे, लेकिन आज भी देश कानून और नीति के बजाय आदेश और अध्यादेश से चलाया जा रहा है। इससे यह संदेश मिलता है कि असंगठित आंदोलन से नुकसान तो ज्यादा हो सकता है, लेकिन ठोस परिणाम हासिल करना मुश्किल है। कई मोर्चों पर सरकार की रफ्तार धीमी बहुदलीय शासन व्यवस्था की वापसी के बाद पदाधिकारियों की संपत्ति जांच के लिए बना आयोग भी अब तक काम शुरू नहीं कर सका है। सरकारी नियुक्तियों में नेताओं के करीबियों को तरजीह देने के आरोप भी लग रहे हैं। सरकारी तंत्र में डर का माहौल है। बड़े पदों से लगातार इस्तीफे हो रहे हैं, जिसे लेकर भी चिंता बढ़ रही है। आर्थिक मोर्चे पर भी हालात बेहतर नहीं हैं। बैंकों में निवेश के लिए पैसा मौजूद है, लेकिन निवेशक पैसा लगाने को तैयार नहीं हैं। विदेशी निवेश भी घटा है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… नेपाल बाढ़- 7 सुरंगों में फंसे कर्मचारियों की तलाश जारी:अब तक 13 हजार से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू, 5 हजार अब भी लापता नेपाल में आई बाढ़ के 13 दिन बाद भी राहत और बचाव अभियान जारी है। रेस्क्यू टीम अलग-अलग 7 हाईड्रोपॉवर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों की तलाश कर रही हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Table of Contents

Source link
यह पोस्ट सबसे पहले भस्कर डॉट कोम पर प्रकाशित हुआ हमने भस्कर डॉट कोम के सोंजन्य से आरएसएस फीड से इसको रिपब्लिश करा है |

Back to top button
Close
Crime
Social/Other
Business
Political
Editorials
Entertainment
Festival
Health
International
Opinion
Sports
Tach-Science
Eng News