सीजी- रायपुर: महंगे डेक्सा स्कैन का विकल्प बनेगा एआई सॉफ्टवेयर? साधारण एक्सरे से हड्डियों की कमजोरी का पता चलेगा – INA

देश में हड्डियों की कमजोरी और बीमारी का पता लगाने के लिए अब महंगे डेक्सा स्कैन पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। छह राष्ट्रीय संस्थान मिलकर एक ऐसा एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) सॉफ्टवेयर तैयार कर रहे हैं, जो साधारण एक्सरे देखकर ही हड्डियों की स्थिति बता देगा। शुरुआती परीक्षण में यह तकनीक 97.7 प्रतिशत तक सटीक साबित हुई है। इस तकनीक के आने से मरीजों का इलाज बेहद आसान और सस्ता हो जाएगा।
छह राष्ट्रीय संस्थान मिलकर कर रहे काम
इस विशेष प्रोजेक्ट का नेतृत्व एम्स देवघर के प्रोफेसर डॉक्टर मनीष राज कर रहे हैं। इसमें एम्स देवघर, एम्स रायपुर, एम्स दिल्ली और एम्स भुवनेश्वर के साथ-साथ आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और एनआईटी जमशेदपुर शामिल हैं। चारों एम्स मरीजों का डेटा और चिकित्सीय मूल्यांकन जुटा रहे हैं, जबकि दोनों तकनीकी संस्थान एआई मॉडल विकसित करने का काम कर रहे हैं।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने इस परियोजना के लिए 1.01 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जबकि प्रोजेक्ट के लिए कुल 1.47 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। यह प्रोजेक्ट 1 फरवरी 2025 को शुरू हुआ था और 31 जनवरी 2028 तक चलेगा।
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दूरदराज के इलाकों में मिलेगी राहत
फिलहाल देश में डेक्सा स्कैन मशीनों की भारी कमी है और इसकी जांच में 8 हजार रुपये तक का खर्च आता है। हर मरीज के लिए इतना खर्च वहन करना संभव नहीं होता। यह तकनीक सफल होने पर दूर-दराज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी साधारण एक्सरे के माध्यम से हड्डियों की कमजोरी का समय पर पता चल सकेगा।
एम्स रायपुर में ऑर्थोपेडिक्स विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉक्टर आलोक सी. अग्रवाल के अनुसार इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से उन गरीब मरीजों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा जो महंगी जांच कराने में असमर्थ हैं।