खबर शहर , मथुरा: 5 करोड़ का प्रस्ताव फाइलों में कैद, 20-25 कॉलोनियों का गंदा पानी सड़क पर; बोर्ड बैठक का इंतजार – INA

मथुरा नगर निगम में बोर्ड बैठक न होने से लोग विकास कार्यों के तरस रहे हैं। वार्ड-33 के पालीखेड़ा में जलनिकासी न होने से लोगों का सड़क पर निकलना भी दूभर हो रहा है। वार्ड के मेजर ध्यानचंद मार्ग पर जलनिकासी के लिए बनाया गया पांच करोड़ रुपये का प्रस्ताव भी फाइल में ही कैद हो गया है।
वार्ड-33 में 1300 मीटर लंबे मेजर ध्यानचंद मार्ग का निर्माण वर्ष 2017 में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने कराया था। इसके बाद मथुरा-वृंदावन नगर निगम का गठन हुआ तो यह मार्ग वार्ड-33 के अंतर्गत आ गया। इस दौरान मार्ग के आसपास कई नई कॉलोनियां विकसित हो गईं। इन कॉलोनियों से निकलने वाले पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण नालियों का गंदा पानी इसी मार्ग पर जमा होने लगा।
स्थानीय पार्षद अभिजीत चौधरी ने जलनिकासी के लिए नाले और मार्ग निर्माण का पांच करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कराकर अधिकारियों को सौंपा था, लेकिन प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिल सकी। करीब एक माह पहले स्थानीय लोगों ने समस्या को लेकर विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद नगर आयुक्त ओजस्वी राज ने मौके पर पहुंचकर मार्ग का निरीक्षण किया। उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया गया कि बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास कराकर निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। साथ ही वहां पर एक पंप सेट लगाकर जलनिकासी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की कराई गई।हालांकि, पिछले तीन माह से महापौर विनोद अग्रवाल ने नगर निगम से दूरी बना रखी है। इससे बोर्ड बैठक होने पर संकट गहरा गया है।
क्या बोले स्थानीय लोग
स्थानीय निवासी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि मेजर ध्यानचंद मार्ग पर कई साल से जलभराव की समस्या बनी हुई है। 20 से 25 कॉलोनियों का पानी इसी मार्ग पर जमा होता है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय निवासी राम सिंह ने बताया कि कई बार अधिकारी मौके पर आकर निरीक्षण कर चुके हैं और समस्या के समाधान का आश्वासन भी दिया है, लेकिन अब तक पानी की निकासी का काम शुरू नहीं हो सका है।
पार्षद अभिजीत चौधरी ने बताया कि जलभराव की समस्या के समाधान के लिए लगभग पांच करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया है। आगामी दिनों में बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
नगर आयुक्त ओजस्वी राज ने बताया कि बोर्ड बैठक कराने के लिए शासन से पत्राचार किया गया है। अनुमति मिलने के बाद . की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।