Tach – बिना ये काम किए macOS और Chrome चलाना पड़ सकता है भारी, कैसे एक फाइल से हो सकता है पूरा सिस्टम कंट्रोल

भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने macOS और गूगल क्रोम इस्तेमाल करने वाले यूज़र्स के लिए एक अहम सुरक्षा चेतावनी जारी की है. इस चेतावनी में बताया गया है कि ऐपल और गूगल के कुछ पुराने सॉफ्टवेयर वर्जन में गंभीर खामियां पाई गई हैं, जिनका फायदा उठाकर हैकर्स यूज़र का डेटा चुरा सकते हैं या पूरे सिस्टम पर कब्जा कर सकते हैं.

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CERT-In के मुताबिक ऐपल के पेजे और कीनोट ऐप्स में सिक्योरिटी से जुड़ी दिक्कतें सामने आई हैं. ये खामियां उन वर्जन में हैं जो Pages 15.1 और Keynote 15.1 से पुराने हैं.

अगर कोई यूज़र गलती से किसी खास तरीके से बनाई गई फाइल खोल लेता है, तो हमलावर को संवेदनशील जानकारी तक पहुंच मिल सकती है. यह समस्या macOS Sequoia 15.6 और उससे पुराने सिस्टम पर ज्यादा असर डाल सकती है. ऐपल ने 28 जनवरी को नए अपडेट जारी कर इन खामियों को ठीक कर दिया है.

इसके अलावा, CERT-In ने गूगल क्रोम को लेकर भी हाई-रिस्क अलर्ट जारी किया है. क्रोम के डेस्कटॉप वर्जन (Windows, macOS और Linux) में एक गंभीर बग पाया गया है, जिससे हैकर रिमोट तरीके से सिस्टम पर कोड चला सकता है.

आसान भाषा में कहें तो, अगर इस खामी का गलत इस्तेमाल हुआ, तो आपका कंप्यूटर पूरी तरह हैक हो सकता है. यह दिक्कत क्रोम के 144.0.7559.109 से पुराने वर्जन में पाई गई है. गूगल ने 27 जनवरी को इसका सिक्योरिटी अपडेट जारी कर दिया है.

CERT-In ने साफ कहा है कि ये खतरा बहुत ज्यादा यूज़र्स तक फैला हुआ नहीं है, लेकिन जो लोग अब भी पुराने सॉफ्टवेयर चला रहे हैं, उनके लिए जोखिम बना हुआ है. खास बात यह है कि कई बार यूज़र को यह पता भी नहीं चलता कि बैकग्राउंड में क्या हो रहा है.

सेफ रहने के लिए क्या करना चाहिए?
एजेंसी ने सभी यूज़र्स और कंपनियों को सलाह दी है कि वे अपने macOS ऐप्स और गूगल क्रोम को तुरंत लेटेस्ट वर्जन पर अपडेट करें. पुराने सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करना न सिर्फ डेटा चोरी का खतरा बढ़ाता है, बल्कि पूरी डिजिटल सुरक्षा को भी कमजोर करता है.

ये मामला एक बार फिर दिखाता है कि साइबर सिक्योरिटी में छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी बन सकती है. इसलिए अपडेट को नजरअंदाज न करें और सुरक्षित रहें.


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