Sport : Exclusive: 4 साल की उम्र में उठाया बल्ला, प्लेइंग-11 में खेलना पक्का….वैभव सूर्यवंशी के बचपन के कोच ने खोले कई राज #INA

- किस उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने क्रिकेट खेलना शुरू किया?
- वैभव सूर्यवंशी को किन चीजों में करना चाहिए इम्प्रूव?
- शर्मीले स्वभाव के बच्चे हैं वैभव सूर्यवंशी
- छक्के-चौके लगाना बचपन से ही पसंद करते हैं वैभव सूर्यवंशी
- प्लेइंग-11 में किसकी जगह खेल सकते हैं वैभव?
- दस साल की उम्र में तैयार हो गए थे वैभव
- वैभव सूर्यवंशी के भाई क्या करते हैं?
Vaibhav Sooryavanshi Manish Ojha Exclusive: भारत के स्टार बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने 15 साल की उम्र में भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाकर इतिहास रच दिया है. वैभव टीम इंडिया में जगह बनाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए हैं. जब-जब ये युवा बल्लेबाज मैदान पर उतरता है, तब-तब हर किसी की नजरें उसपर टिक जाती हैं और अपने शानदार प्रदर्शन से सभी का दिल जीतता है. आईपीएल 2026 में अपने नाम का लोहा मनवाने के बाद अब वैभव सूर्यवंशी नीली जर्सी में भारतीय क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार हैं. टीम इंडिया में सिलेक्शन पर आइए जानते हैं कि उनके बचपन के कोच मनीष ओझा ने क्या-क्या कहा…
किस उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने क्रिकेट खेलना शुरू किया?
हमारा चैनल से हुई खास बातचीत में वैभव सूर्यवंशी के बचपन के कोच मनीष ओझा ने बताया कि, वैभव सूर्यवंशी ने चार साढे चार साल की उम्र में ही घर पर बल्ला पकड़ लिया था और वह प्लास्टिक की गेंद से क्रिकेट खेला करते थे. उनके इंट्रेस्ट को देखते हुए पिता जी हमारे पास लेकर आए, तब उनकी उम्र आठ या साढ़े आठ साल की ही रही होगी. तभी से वह मेरे पास रेगुलर आते रहे और अब तो वह व्यस्त हो गए हैं. पिछले साल तक उन्हें जब भी मौका मिलता था, वो आते रहे और कम उम्र में ही उनकी ट्रेनिंग शुरू हो गई थी. किसी भी प्लेयर को बनने में आठ से दस साल तो लगता है. वैभव की उम्र कम है, लेकिन उनकी क्रिकेटिंग जर्नी लंबी रही है.
वैभव सूर्यवंशी को किन चीजों में करना चाहिए इम्प्रूव?
कोच ने बताया, वैभव सूर्यवंशी ने वक्त के साथ अपने खेल में काफी बदलाव किए हैं. अब उनके स्ट्रोक्स और बॉल सिलेक्शन की क्षमता में काफी अंतर देखने को मिला है. अब वह पहले से और भी ज्यादा आक्रामक बल्लेबाजी करते हैं. उनकी बल्लेबाजी का अप्रोच वक्त के साथ बेहतर होता जा रहा है. एक खिलाड़ी जीवनभर सीखता है और हमेशा ही बेहतर की गुंजाइश होती है. वैभव तो अभी बच्चे हैं और वह आने वाले वक्त में काफी कुछ सीखेंगे. उनमें उम्र के हिसाब से तो उनमें कई सारी एक्सेप्शनल क्वालिटीज हैं. अभी वह अपने प्राइम फॉर्म में हैं कॉन्फिडेंट हैं और वह अच्छी मानसिक स्थिति में हैं.
शर्मीले स्वभाव के बच्चे हैं वैभव सूर्यवंशी
वैभव सूर्यवंशी के नेचर के बारे में बात करते हुए कोच ने बताया कि, वैभव सूर्यवंशी सिनसियर बच्चा था. वो ज्यादा बातें नहीं करता था. एकेडमी में वो प्रैक्टिस के लिए आता था, तो 95% बच्चे उससे बड़े थे. उनसे बात नहीं करता था. वैभव के पिता जी भी अक्सर ट्रेनिंग के दौरान आया करते थे, तो वो उनसे डरते थे, तो कम ही बोलते थे. ग्राउंड पर मैंने उसके मुंह से YES/NO के अलावा शायद ही कभी कुछ सुना होगा.
A maiden #TeamIndia call-up at the age of 1️⃣5️⃣ 🌟
Congratulations . Vaibhav Sooryavanshi on setting a remarkable record 👏 pic.twitter.com/htOt9kci4p
— BCCI (@BCCI) June 6, 2026
छक्के-चौके लगाना बचपन से ही पसंद करते हैं वैभव सूर्यवंशी
वैसे तो वैभव सूर्यवंशी काफी शर्मीले स्वभाव के थे और सवाल-जवाब करने की उन्हें आदत नहीं थी. मगर बचपन का किस्सा साझा करते हुए कोच ने बताया कि एक बार वैभव ने उनसे अपने मन की बात की थी. उन्होंने बताया कि, वैभव सूर्यवंशी शुरुआत से ही बड़े-बड़े शॉट्स लगाने लगे थे. छक्के-चौकों से ही रन बनाते थे.
तो हमने उसे समझाया कि आपको आगे चलकर 4 दिन वाले मैच भी खेलने हैं, तो वहां आपको 4 दिन में 2250 गेंदें खेलनी होंगी, तो आप सिर्फ छक्के-चौके नहीं मार सकते हैं वहां पर. वहां आपको छक्के-चौके मारने के साथ-साथ डिफेंस भी करना होगा. तो इसपर वैभव ने कहा कि, जब मैं किसी गेंद पर छक्के-चौके लगा सकता हूं, तो उसपर सिंगल-डबल क्यों लूं.
प्लेइंग-11 में किसकी जगह खेल सकते हैं वैभव?
वैभव सूर्यवंशी को भारतीय क्रिकेट टीम में मौका मिल गया है. अब ऐसे में क्रिकेट के गलियारों में सवाल है कि क्या उन्हें प्लेइंग-11 में भी मौका मिलेगा या फिर अभी उन्हें अपनी बारी का इंतजार करना होगा. इसपर बचपन के कोच मनीष ओझा ने कहा, देखिए जब उन्होंने आईपीएल खेलना शुरू किया था, तब कुछ लोगों ने मुझसे इस बारे में बात की थी कि राजस्थान रॉयल्स के लिए तो वैभव सूर्यवंशी और संजू सैमसन ओपनिंग करते हैं.
तब भी मैंने कहा था कि ग्रेट प्लेयर्स अपने रास्ते खुद ही बना लेते हैं और वो अपने प्रदर्शन से पोटेंशियल से आगे आ जाएंगे. ऐसे में अब टीम इंडिया में वह किसकी जगह खेलेंगे, ये तो मैनेजमेंट को सोचना होगा, लेकिन ये तय है कि उन्हें जगह जरूर मिलेगी. ऐसे प्लेयर्स बैठने के लिए पैदा नहीं होते. ये डिलिवर करने के लिए पैदा होते हैं.
The next chapter of the 𝘝𝘢𝘪𝘣𝘩𝘢𝘷 𝘚𝘰𝘰𝘳𝘺𝘢𝘷𝘢𝘯𝘴𝘩𝘪 story that we’re excited . watch unfold 🇮🇳💪 pic.twitter.com/n5gRzlcwHp
— Rajasthan Royals (@rajasthanroyals) June 6, 2026
दस साल की उम्र में तैयार हो गए थे वैभव
कोच ने बचपन के उस किस्से को याद किया, जब उन्हें अहसास हो गया था कि वैभव सूर्यवंशी बड़े स्तर पर खेलने के लिए तैयार हैं. कोच ने बताया कि, एक मैच चल रहा था एकेडमी में, तभी वैभव वहां पर आए, तो मैंने उनसे कहा कि तुम भी ये मैच खेल लो. फिर जब वो बैटिंग करने लगा, तो मैं फिर बैठकर उसे ही देखने लगा. जबकि विपक्षी टीम में काफी सीनियर प्लेयर्स थे, लेकिन वैभव निडर होकर बल्लेबाजी कर रहा था.
तब वो दस और साढ़े दस साल का रहा होगा, जबकि सामने वाली टीम के प्लेयर्स अंडर-19 ग्रुप के थे और रणजी ट्रॉफी के भी थे. उन सबके बीच में वैभव ने 93 बॉल्स पर 118 रन बनाए थे. उस दिन कम से कम 7-8 लंबे छक्के लगाए थे. तब मैंने भी अपना प्रैक्टिस सेशन कैंसिल कर दिया और बैठकर उसका मैच ही देखने लगा. उसके पिता जी भी तब वहीं पर थे, जब वह आउट होकर वापस लौटने लगे, तब मैंने उसके पिता जी से कहा कि अब ये बड़े स्तर पर क्रिकेट खेलने के लिए तैयार है.
वैभव सूर्यवंशी के भाई क्या करते हैं?
बचपन के कोच मनीष ओझा ने आगे बताया कि, वैभव सूर्यवंशी के बड़े भाई पढ़ाई करते हैं और छोटे भाई भी अभी पढ़ाई कर रहे हैं. उन्हें कोई प्रोफेशनल ट्रेनिंग नहीं दी जा रही है. ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि वैभव के पिता ने उनके टैलेंट को कम उम्र में ही पहचाना और छोटी उम्र में ही उनका एडमिशन ट्रेनिंग एकेडमी में करा दिया था.
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