खबर शहर , आगरा: खाद्यान्न उठान का खेल, ब्लैकलिस्ट ठेकेदार परिवार के ट्रकों से ढुलाई; अफसरों की भूमिका पर सवाल – INA

खाद्यान्न उठान टेंडर घोटाले में अफसरों और ब्लैकलिस्ट ठेकेदार की मिलीभगत का एक और खुलासा हुआ है। आला अधिकारियों के जांच-जांच खेलने के बीच ब्लैकलिस्ट फर्म के ठेकेदार अपने ही रिश्तेदारों के नाम पर दर्ज ट्रकों से एफसीआई के गोदामों से धड़ल्ले से माल का उठान कर रहे हैं। खास बात ये है कि इसमें एक ट्रक भाई विजेन्द्र गुप्ता के नाम पर दर्ज है। विजेन्द्र गुप्ता ने नाम दर्ज ट्रक की मदद से ही जितेन्द्र गुप्ता खाद्यान्न की कालाबाजारी करते हुए पकड़ा गया था। इसी मामले में ट्रक को जब्त कर जितेन्द्र पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी, लेकिन विजेन्द्र पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
विभाग यह दावा कर रहा है कि ब्लैकलिस्ट फर्म का न तो दूर-दूर तक टेंडर से कोई वास्ता है, और न ही उसके किसी करीबी को टेंडर दिया गया है। वहीं, उठान में इस्तेमाल हो रहे वाहनों पर लिखे नाम कुछ और ही गवाही दे रहे हैं। इस नए खुलासे के बाद अब विभागीय अफसरों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। उधर, मामले में क्षेत्रीय खाद्य नियंत्रक (आरएफसी) विजय कुमार के आदेश पर शुरू हुई जांच के बीच डिप्टी आरएमओ पहले ही अपना पल्ला झाड़ते हुए उच्चाधिकारियों पर ठीकरा फोड़ चुके हैं। फिलहाल जांच की आड़ में मिलीभगत का खेल बदस्तूर जारी है।
दरअसल, कालाबाजारी में फंसने के बाद ब्लैकलिस्ट हुआ मैनपुरी निवासी ठेकेदार जितेंद्र कुमार गुप्ता और उसका भाई विजेंद्र कुमार गुप्ता अब सिंडिकेट के जरिये अपने बेटों, भतीजों और करीबी रिश्तेदारों के नाम पर कागजों में नई और फर्जी फर्में तैयार कर काम कर रहे हैं। टेंडर भले ही कागजों में रिश्तेदार की फर्म के नाम पर दर्ज हो लेकिन खाद्यान्न के उठान और परिवहन में आज भी ब्लैकलिस्ट ठेकेदार के अपने पुराने ट्रकों का ही इस्तेमाल बेखौफ किया जा रहा है।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आरोपी ठेकेदार 14 अक्तूबर तक विभाग के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुपों में बेफिक्र होकर जुड़ा रहा। जब मीडिया में खबर उजागर हुई, तब आनन-फानन में उसे ग्रुप से बाहर किया गया। इसके बावजूद आरोपी फर्म को उठान का काम जारी रखने दिया गया और बिलिंग व पेमेंट की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई। उधर, एडीएम वित्त भी धांधली की शिकायत की जांच के स्पष्ट लिखित आदेश जारी किए जा चुके हैं, फिर भी दागी ठेकेदार को पूरी छूट दी जा रही है।
मामले में डिप्टी आरएमओ नंद किशोर का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया मंडल स्तर पर होती है और संशोधित पत्र उन्होंने उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जारी किया था। क्षेत्रीय खाद्य नियंत्रक विजय कुमार ने कहा कि प्रकरण की विस्तृत जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। अगर किसी विभागीय अफसर या कर्मी की भूमिका मिलती है तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।