बेल्जियम PM बोले- मोदी ने हमें पहले ही चेताया था:तब हमने नहीं सुनी, अमेरिका-चीन के भरोसे रहने का खतरा अब समझ आ रहा- INA NEWS

बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने गुरुवार को कहा कि यूरोप को अब आर्थिक निर्भरता का खतरा समझ आ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोप को इस बारे में काफी पहले चेताया था। दिल्ली में CII के कार्यक्रम में उन्होंने कहा- दुनिया तेजी से बदल रही है, लेकिन यूरोप इस बदलाव के साथ कदम नहीं मिला पा रहा। वह बूढ़ा हो चुका है। वेबर के मुताबिक चीन और अमेरिका, यूरोप से बहुत आगे निकल चुके हैं। इनोवेशन और प्रोडक्टिविटी में यूरोप बहुत पीछे चला गया है, इसलिए उसे हर तरफ से झटके लग रहे हैं। यूरोप अपनी रक्षा करने में सक्षम नहीं डी वेवर ने कहा कि यूरोप की कमजोरी सिर्फ अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है। यूरोपीय देश अपनी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी खुद उठाने की स्थिति में भी नहीं हैं। यूरोप को हर समय अपमानित होना पड़ता है। वेवर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब यूरोपीय देशों पर अपनी सुरक्षा का ज्यादा जिम्मा खुद उठाने का दबाव बढ़ रहा है। ट्रम्प लंबे समय से NATO के यूरोपीय देशों से रक्षा पर ज्यादा पैसा खर्च करने को कहते रहे हैं। 2017 से उन्होंने NATO देशों को अपनी GDP का कम से कम 2% रक्षा पर खर्च करने पर जोर दिया। 2018 में उन्होंने इसे बढ़ाकर 4% करने की बात कही। इसके बाद 2025 में NATO देशों ने 2035 तक रक्षा और सुरक्षा पर GDP का 5% खर्च करने का लक्ष्य तय किया। वेबर ने कहा- अब हम सुन रहे हैं। यूरोप को यह समझ थोड़ी देर से आई है, लेकिन अब यह बदलाव हो रहा है। उन्होंने यूरोप की इस स्थिति को ‘रूड अवेकनिंग’ यानी कड़वी हकीकत से जागना बताया। सस्ते आयात से कमजोर हुई यूरोप की इंडस्ट्री वेवर ने कहा कि यूरोप ने लंबे समय तक विदेशी कंपनियों को बड़े पैमाने पर अपने बाजार में जगह दी। कम कीमत पर आने वाले सामान ने यूरोप की स्थानीय कंपनियों के लिए मुश्किलें बढ़ाईं और धीरे-धीरे वहां की इंडस्ट्री कमजोर होती गई। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था का सबसे ज्यादा फायदा जिस देश को हुआ, वह यूरोप का करीबी पड़ोसी है और उसे सभी जानते हैं। डी वेवर ने देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके इस बयान को चीन की ओर इशारा माना जा रहा है। भारत को बताया ‘नंबर-1’ रणनीतिक पार्टनर डी वेवर ने भारत को यूरोप के लिए सबसे अहम रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि यूरोप को ऐसे देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने चाहिए, जो सहयोग और बहुपक्षीय व्यवस्था में भरोसा रखते हों और ताकत के बजाय आपसी सम्मान के आधार पर संबंध बनाते हों। उन्होंने कहा, “अगर भारत उस सूची में नहीं है तो आपने कुछ बहुत बुनियादी बात मिस कर दी है। भारत उस सूची में है। नंबर-1।” डी वेवर ने भारत की तेज आर्थिक growth, बड़ी टैलेंट पूल और टेक्नोलॉजी क्षमता को दोनों पक्षों के लिए बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोप के बीच व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की बड़ी संभावनाएं हैं। बेल्जियम खुद भी बजट के दबाव में डी वेवर की ये चिंताएं ऐसे समय सामने आई हैं, जब बेल्जियम सरकार खुद बड़े बजट कटौती के फैसलों की तैयारी कर रही है। सरकार का लक्ष्य 2029 तक करीब 10 अरब यूरो यानी 11.7 अरब डॉलर की बचत करना है। प्रधानमंत्री ने माना कि इन फैसलों का असर देश के लगभग हर वर्ग पर पड़ेगा। उन्होंने कहा, “मैं अच्छी नींद नहीं ले पा रहा हूं और इस बारे में बहुत सोचता हूं।” डी वेवर ने कहा कि बजट का घाटा सिर्फ अमीरों पर ज्यादा टैक्स लगाकर पूरा नहीं किया जा सकता। वहीं, खर्च में कटौती को लेकर उन्होंने कहा कि आम तौर पर हर कोई चाहता है कि बचत का असर किसी और पर पड़े, उस पर नहीं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, “हर कोई सोचता है कि अगर बचत करनी है तो उसका खर्च मेरे पड़ोसी पर पड़े, मुझ पर नहीं।”

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यह पोस्ट सबसे पहले भस्कर डॉट कोम पर प्रकाशित हुआ हमने भस्कर डॉट कोम के सोंजन्य से आरएसएस फीड से इसको रिपब्लिश करा है |

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