इजराइल-नई सरकार बनाने के लिए आइजनकोट ने रखीं 4 शर्तें:कहा- इन्हें मानने वाले दलों के लिए गठबंधन के दरवाजे खुले- INA NEWS

इजराइल में 27 अक्टूबर को हुए चुनाव के बाद किसी भी गठबंधन को सरकार बनाने लायक बहुमत नहीं मिला है। देश की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की जरूरत है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिली हैं। वहीं, अरब पार्टियों के खाते में 19 सीटें आई हैं। गादी आइजनकोट की पार्टी याशर ने 21 सीटें जीतकर विपक्ष में सबसे ज्यादा सीटें हासिल की हैं। ऐसे में आइजनकोट ने नई सरकार बनाने के लिए चार शर्तें रखी हैं। इजराइली मीडिया वाय-नेट को मुताबिक, उन्होंने कहा कि जो भी सांसद और राजनीतिक दल इन शर्तों को मानने के लिए तैयार होंगे, उनके लिए गठबंधन सरकार में शामिल होने का रास्ता खुला रहेगा। पहली शर्त- इजराइल यहूदी और लोकतांत्रिक देश बना रहे आइजनकोट की पहली शर्त है कि इजराइल की पहचान एक यहूदी, लोकतांत्रिक, उदार और सभी को बराबर अधिकार देने वाले देश के रूप में बनी रहे। इसका मतलब है कि देश की सरकार यहूदी पहचान को बनाए रखने के साथ लोकतंत्र और नागरिकों की आजादी का भी सम्मान करे। किसी भी धर्म या समुदाय के लोगों के साथ भेदभाव न हो और सभी को बराबर अधिकार मिलें। इस शर्त के जरिए आइजनकोट यह साफ करना चाहते हैं कि नई सरकार केवल किसी एक समुदाय या राजनीतिक विचारधारा के हित में काम न करे, बल्कि पूरे देश के लोगों का प्रतिनिधित्व करे। दूसरी शर्त- सभी नागरिकों के लिए सैन्य सेवा जरूरी हो तीसरी शर्त के तहत आइजनकोट चाहते हैं कि इजराइल के सभी नागरिकों के लिए सैन्य, राष्ट्रीय या नागरिक सेवा करना जरूरी हो। यानी देश का हर नागरिक किसी न किसी रूप में देश की सेवा करे। यह मुद्दा इजराइल की राजनीति में लंबे समय से विवाद की वजह बना हुआ है। वहां आमतौर पर यहूदी नागरिकों के लिए सेना में सेवा करना जरूरी है। लेकिन ज्यादा धार्मिक हरेदी समुदाय को लंबे समय से इससे छूट मिलती रही है। इस समुदाय के लोग धार्मिक पढ़ाई के लिए अपना समय देते हैं इसलिए इन्हें सेना में भर्ती से छूट दी जाती है। लेकिन, आइजनकोट की पार्टी का कहना है कि जब देश युद्ध और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब सेना की जिम्मेदारी सभी को उठानी चाहिए। तीसरी शर्त- आजादी के समय तय किए गए सिद्धांतों का पालन हो दूसरी शर्त है कि नई सरकार 1948 में इजराइल की आजादी के समय तय किए गए सिद्धांतों का पालन करे। इनमें देश को यहूदी राज्य बनाने के साथ लोकतंत्र, आजादी, न्याय और सभी नागरिकों को बराबर अधिकार देने की बात शामिल है। आइजनकोट चाहते हैं कि सरकार इन्हीं मूल्यों के आधार पर काम करे। यह शर्त इसलिए अहम है क्योंकि नेतन्याहू सरकार के दौरान न्यायपालिका में बदलाव को लेकर विवाद हुआ है। आरोप है कि इन बदलावों से लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हो सकती हैं। आइजनकोट ने इन बदलावों से जुड़े विवादित कानून रद्द करने का भी वादा किया है। चौथी शर्त- हमास का गाजा पर शासन खत्म हो आइजनकोट की चौथी शर्त है कि गाजा में हमास का शासन खत्म किया जाए और उसकी सैन्य ताकत भी कमजोर की जाए। हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजराइल पर हमला किया था। इसमें बड़ी संख्या में लोग मारे गए और कई लोगों को बंधक बना लिया गया। इसके जवाब में इजराइल ने गाजा में सैन्य अभियान शुरू किया, जिसमें भारी तबाही हुई और बड़ी संख्या में फिलिस्तीनी मारे गए। इजराइल का कहना है कि अपनी सुरक्षा के लिए हमास की सैन्य ताकत खत्म करना और उसे दोबारा गाजा की सत्ता में आने से रोकना जरूरी है। आइजनकोट भी चाहते हैं कि नई सरकार इस दिशा में काम करे। आइजनकोट विपक्षी नेताओं से मिल रहे इजराइल में चुनाव के बाद राष्ट्रपति सभी दलों के नेताओं से बात करते हैं। इसके बाद वे किसी एक सांसद को सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपते हैं। उस सांसद को तय समय में संसद का विश्वास हासिल करना होता है। इजराइल में सरकार बनाने के लिए चुने गए नेता को शुरुआत में 28 दिन का समय मिलता है। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति इसे 14 दिन और बढ़ा सकते हैं। यानी सरकार बनाने के लिए कुल 42 दिन मिल सकते हैं। इस दौरान नेता को दूसरी पार्टियों से बातचीत कर समर्थन जुटाना होता है। इसके लिए पार्टियों के बीच नीतियों और मंत्रिपदों को लेकर समझौते हो सकते हैं। चुनाव नतीजे आने के बाद से ही आइजनकोट नेतन्याहू विरोधी दलों के नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। उनकी कोशिश ज्यादा से ज्यादा सांसदों का समर्थन जुटाकर राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के सामने सरकार बनाने का दावा मजबूत करने की है। लिकुड पर याशार के सांसदों को तोड़ने की कोशिश का आरोप याशार पार्टी ने नेतन्याहू की लिकुड पार्टी पर उसके सांसदों को अपने पाले में लाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। पार्टी के मुताबिक, लिकुड के कुछ नेता उसके सांसदों को फोन कर नेतन्याहू का समर्थन करने के लिए मना रहे हैं। जारी बयान में याशार ने कहा कि चुनाव में हार के बाद लिकुड के नेता परेशान हैं और उसके सांसदों से संपर्क कर रहे हैं। ————————- यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प की नेतन्याहू से फोन पर बात: बाद में बोले- ईरान के 1-2 ठिकाने उड़ाने बाकी, रिपोर्ट- अमेरिका 4 नवंबर को हमला कर सकता है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से शनिवार को फोन पर बातचीत की। यह जानकारी वॉल स्ट्रीट जर्नल ने दी। पूरी खबर पढ़ें…

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यह पोस्ट सबसे पहले भस्कर डॉट कोम पर प्रकाशित हुआ हमने भस्कर डॉट कोम के सोंजन्य से आरएसएस फीड से इसको रिपब्लिश करा है |

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